
प्रतीकात्मक फोटो
2002 में दहेज न मिलने पर महिला को ससुराल वालों ने जिंदा जला दिया था। इस मामले में न्यायालय में सुनवाई के दौरान पति और देवर पर दोष सिद्ध हुआ। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 10-10 साल की सजा कैद और 22-22 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में मृतका की ननद भी आरोपी थी। पर्याप्त सबूत न मिलने पर ननद को बरी कर दिया गया है।
बलिया की लड़की की आजमगढ़ में हुई थी शादी
मुकदमें के अनुसार बलिया जिले के रसड़ा कस्बे के गौरैया निवासी सतीश चंद्र गुप्ता ने अपनी बहन निशा की शादी अप्रैल 1999 में की थी। शादी आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के ईश्वरपुर निवासी हरिनाथ के साथ हुई थी।
शादी के बाद से ही पति मांगता था दहेज
आरोप है कि शादी के बाद पचास हजार रुपए दहेज की मांग को लेकर ससुराल में निशा का उत्पीड़न करते थे। उसे मारा-पीटा जाता था। इसकी शिकायत उसने कई बार अपने भाई और परिवार के लोगों से की थी।
29 अप्रैल 2002 को की गई हत्या
दहेज न मिलने पर पति 29 अप्रैल 2002 को अपने भाई और बहन के साथ मिलकर निशा को जिंदा जला दिया। आरोप लगाया कि उसने खुद आत्महत्या कर ली।
भाई ने दर्ज कराया था हत्या का मुकदमा
मृतका निशा की मौत के बाद उसके भाई सतीश गुप्ता ने ससुरलवालों के विरुद्ध दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। इसमें पति, उसके भाई, बहन, मां और पिता को नामजद किया गया था।
पुलिस ने न्यायालय में जमा की चार्जशीट
इस मामले में अतरौलिया पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। मुकदमें के दौरान निशा के सास और ससुर की मौत हो गई।
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सात गवाहों ने न्यायालय में दिया बयान
अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता श्रीश कुमार चौहान ने वादी समेत सात गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों के बयान के बाद कोर्ट ने माना कि पति और देवर निशा की हत्या में दोषी हैं।
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अपर सत्र न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर छह रामानंद ने आरोपी पति हरिनाथ तथा देवर रामनाथ को दस दस वर्ष सश्रम कारावास तथा प्रत्येक को 22 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। पर्याप्त सबूत के अभाव में आरोपी ननंद को दोषमुक्त कर दिया।
Published on:
28 Jan 2023 10:06 am
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