
बाढ़
आज़मगढ़/बलिया/गोरखपुर/सिद्धार्थनगर. नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर से शुरू हुई बाढ़ से नुकसान का मंज़र लोगों को डराने लगे हैं। हजारों बीघा फसल बाढ़ में जलमग्न हो चुकी हैं। बाढ़ की पिछली तबाही को याद कर लोग डरे हुए हैं। घाघरा से लेकर रप्ति और सरयू का उफान देखकर तटवर्तियों में दहशत है। दर्जनों गांव और घर खतरे में हैं तो कटान से लोगों की कीमती उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। गोरखपुर बस्ती मंडल में सरयू, राप्ति, गंडक और घाघरा जैसी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से वहां के लोग भयभीत हैं तो आज़मगढ़ और बलिया में भी घाघरा की दहशत से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की नींदें उड़ी हुई हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से राहत और बचाव की पूरी तैयारी का दावा करते हुए बढ़ चौकियां सक्रिय कर दिये जाने की बात कही जा रही हैं, लेकिन लोगों को शिकायत है कि अधिकारी मीटिंग और फाइलों से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
नदियों के जलस्तर का आलम ये है कि गोरखपुर में राप्ति नदी चेतावनी बिन्दु पार कर चुकी है और करीब एक सेमी की रफ्तार से बढ़ रही है। यहां राप्ति वार्निंग लेवल से दो सेमी ऊपर 74.0 पर बह रही है। सिद्धार्थनगर में भी राप्ति वार्निंग लेवल 83.9 से काफी ऊपर 84.38 सेमी पर बह रही है। घाघरा बलिया में डेंजर लेवल से 11 सेमी ऊपर 64.12 सेमी तो गंडक भी कुशीनगर में चेतावनी बिन्दु पार कर खतरे के निशान से महज़ 22 सेमी नीचे बह रही है। सरयू का भी यही आलम है। गोला में सरयू खतरे के निशान को पार कर गयी है।
गोरखपुर में आधा दर्जन गांवों के पानी से घिरने के बाद यहां बाढ़ की आशंका से लोग डरे हुए हैं। इलाके में सम्पर्क मार्गों पर भी पानी बह रहा है। सरयू का पानी भी हदें तोड़कर डेरवां, बलथर व डुमरी समेत तटवर्ती गांवों की ओर बढ़ रहा है। राप्ति और घाघरा में बाढ़ से इलाके में कटान हो रहा है। इससे जगदीशपुर गांव के लोगों में दहशत है। इसी तेज़ी से कटन हुआ तो गांव के अस्तित्व पर खतरा हो सकता है। उधर राप्ति के ओवरफ्लो होने से कई सौ एकड़ फसलें प्रभावित हुई हैं। यहां भी पानी तेज़ी से गांवों की ओर बढ़ रहा है।
आज़मगढ़ में घाघरा नदी के खतरे के निशान से ऊपर बह रही है जिसके चलते देवारा खास राजा, चक्की हाजीपुर, सोनौरा, अभ्भनपट्टी, झगरहवा, आराजी अजगरा मगरबी, आराजी अजगरा मशरकी, मानिकपुर, झंझनपुर सहित दर्जनों गांवों के रास्ते बंद हो चुके है। महराजगंज ब्लाक के महाजी देवारा जदीद गांव में तो हालत बद से बदतर है।
यहां वर्ष 2009 में बसपा शासनकाल में पुल का निार्मण शुरू हुआ लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। परिणाम है कि यहां लोग जान जोखिम में डालकर बाहर निकल रहे हैं।फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र के रोशनगंज देवारा, इस्माइलपुर, निबिहवा के 25 पुरवों के सैकडों किसानों के खेत में गन्ना,बाजरा, ज्वार, धान, सब्जी आदि की फसल जलमग्न हो गई है। अन्य क्षेत्रों में तेजी से बाढ़ का पानी फसलों की तरफ बढ़ रहा है।
आज़मगढ़ में जिलाधिकारी राजेश कुमार व पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह बाढ़ क्षेत्र बरदहुआ, गांगेपुर, गढ़वल, सहबदिया, हाजीपुर, गंगा गौरी महाविद्यालय रामनगर बैजाबारी, कुंड़ही ढाला, शिवपुर चौकी, सहदेवगंज, चिकनहवा बाजार का निरीक्षण कर चुके है। डीएम ने बाढ़ चौकियों पर सभी सुरक्षा उपकरण रखने व शिफ्टवार ग्राम्य विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत, पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने का निर्देश दिया है। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को गांवों में जाकर क्लोरिन की गोली आदि के वितरण का निर्देश दिया गया है लेकिन मौके पर कुछ नजर नहीं आ रहा है। लोग बाढ़ से सहमे हुए है। अभी यह हालत है आगे क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
घाघरा की बाढ़ कोई नई बात नहीं है। हर साल सगड़ी तहसील क्षेत्र के लोगों को घाघरा की तबाही झेलनी पड़ती है। इस साल अभी ठीक से बरसात शुरू भी नहीं हुई है और घाघरा ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। घाघरा खतरे के निशान को पार कर गयी है। डिघिया गेज पर नदी खतरे के निशान से 46 सेमी ऊपर बह रही है। बदरहुआ नाले पर भी नदी खतरे का निशान पार कर चुकी है। नदी के खतरे के निशान के उपर बहने का परिणाम है कि देवारा खास राजा, चक्की हाजीपुर, सोनौरा, अभ्भनपट्टी, झगरहवा, आराजी अजगरा मगरबी, आराजी अजगरा मशरकी, मानिकपुर, झंझनपुर सहित दर्जनों गांवों के रास्ते बंद हो चुके है। महराजगंज ब्लाक के महाजी देवारा जदीद गांव में तो हालत बद से बदतर है। यहां वर्ष 2009 में बसपा शासनकाल में पुल का निार्मण शुरू हुआ लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। परिणाम है कि यहां लोग जान जोखिम में डालकर बाहर निकल रहे हैं। अन्य गांवों की हालत इससे अलग नहीं है लेकिन वहां के लोगों को इस बात का संतोष है कि सरकार ने आजादी के 70 साल में कभी उनके बारे में सोचा ही नहीं। इसलिए उक्त गांवों के लोगों ने खुद को प्रकृति के भरोसे छोड़ दिया है।
दर्जनों गांवों के रास्ते बंद
नदी के खतरे के निशान के उपर बहने का परिणाम है कि देवारा खास राजा, चक्की हाजीपुर, सोनौरा, अभ्भनपट्टी, झगरहवा, आराजी अजगरा मगरबी, आराजी अजगरा मशरकी, मानिकपुर, झंझनपुर सहित दर्जनों गांवों के रास्ते बंद हो चुके है। महराजगंज ब्लाक के महाजी देवारा जदीद गांव में तो हालत बद से बदतर है। यहां वर्ष 2009 में बसपा शासनकाल में पुल का निार्मण शुरू हुआ लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ। परिणाम है कि यहां लोग जान जोखिम में डालकर बाहर निकल रहे हैं। अन्य गांवों की हालत इससे अलग नहीं है लेकिन वहां के लोगों को इस बात का संतोष है कि सरकार ने आजादी के 70 साल में कभी उनके बारे में सोचा ही नहीं। इसलिए उक्त गांवों के लोगों ने खुद को प्रकृति के भरोसे छोड़ दिया है। अन्य गांवों की हालत इससे अलग नहीं है लेकिन वहां के लोगों को इस बात का संतोष है कि सरकार ने आजादी के 70 साल में कभी उनके बारे में सोचा ही नहीं। इसलिए उक्त गांवों के लोगों ने खुद को प्रकृति के भरोसे छोड़ दिया है। फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र के रोशनगंज देवारा, इस्माइलपुर, निबिहवा के 25 पुरवों के सैकडों किसानों के खेत में गन्ना,बाजरा, ज्वार, धान, सब्जी आदि की फसल जलमग्न हो गई है। अन्य क्षेत्रों में तेजी से बाढ़ का पानी फसलों की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन साहब सिर्फ, सिर्फ निर्देश तक व्यस्त हैं। लोग घर से बाहर कैसे निकलेंगे, जरूरत का सामान कैसे घर तक पहुंचेगा, बीमार को दवा कैसे मिलेगी इस तरफ प्रशासन का ध्यान बिल्कुल नहीं है।
Published on:
11 Jul 2020 05:29 pm
बड़ी खबरें
View Allआजमगढ़
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
