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निकाय चुनावः सपा और भाजपा पर भारी पड़ सकती है यह जंग

टिकट न मिलने की स्थित में बगावत के मूड में दिख रहे कई दावेदार

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BJP and SP

निकाय चुनावः सपा और भाजपा पर भारी पड़ सकती है यह जंग

आजमगढ़. प्रशासन नगर निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटा है। इस चुनाव को फतह करने के लिए राजनीतिक दल भी ताकत से मैदान में उतरने को तैयार है। जिले की दोनों नगर पालिकाओं के वार्डों के आरक्षण की अंतिम सूची जारी हो चुकी है। सात दिन में फाइनल सूची भी जारी हो जायेगी। इसके साथ ही टिकट कें लिए घमासान भी शुरू हो गयी है। खासतौर पर भाजपा और सपा में दोवेदारों की लंबी फेहरिश्त दिख रही है। टिकट न मिलने की स्थित में कई दावेदार बगावत के मूड में भी दिख रहे है। जो इन दलों पर भारी पड़ सकता है।

बता दें कि आजमगढ़ सपा और बसपा का गढ़ कहा जाता है। हाल में हुए यूपी चुनाव में दोनों दलों को भले ही करारी हार मिली में लेकिन आजमगढ़ में सपा पांच और बसपा चार सीट जीतने में सफल रही है। लहर के बाद भी भाजपा को मात्र एक सीट पर संतोष करना पड़ा। यूपी में बड़ी जीत हासिल करने वाली भाजपा की साख निकाय चुनाव में दाव पर लगी है। कारण कि खुद भाजपाई इसे लोकसभा का सेमीफाइनल मान रहे हैं। वहीं सपा और बसपा भी निकाय चुनाव में अपना खोया जनाधार वापस पाने के लिए बड़ी जीत दर्ज करने के लिए बेचैन है।

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भाजपा से केवल आजमगढ़ अध्यक्ष सीट के लिए एक दर्जन दावेदार हैं तो वार्डों में भी किसी सीट पर आधा दर्जन से कम दावेदार नहीं है। सपा और बसपा के दावेदार भाजपा की तुलना में कम है लेकिन इनके यहां भी हर सीट पर आधा दर्जन लोग लाइन में हैं। भीतर खाने से आ रही खबरों पर विश्वास करें तो मुस्लिम प्रत्याशी उतारकर लगातार तीन चुनाव हार चुकी सपा इस बार किसी और पर दाव खेलना चाहती है। विधानसभा चुनाव में यादव बनाम अदर की लड़ाई देखते हुए वह यादव प्रत्याशी पर भी दाव नहीं खेलना चाहती। जबकि यहां सर्वाधिक दावेदार इन्हीं जातियों से हैं। अन्य जातियों के मजबूत दावेरार है लेकिन फैसला सपा नेतृत्व को करना है। कारण कि यहां हमेशा से जातीय समीकरण हाबी रहे हैं। बसपा में बाहर से शांति दिख रही है लेकिन भीतर से यहां भी दावेदार पूरी ताकत लगा रहे है।

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तीनों दलों में एक बात कामन दिख रही है सभी के यहां दावेदार टिकट न मिलने की स्थित में दूसरे प्रत्याशी को देख लेने की हवा उड़ा रहे हैं। इससे पार्टी सीधे तौर पर दबाव में दिख रही हैं। इनके लिए यह बड़ा खतरा भी है। अगर पार्टी के दावेदार टिकट न मिलने की स्थित में बगावत करते है या दूसरे दल में जाते हैं तो पार्टी के लिए जीत पाना मुश्किल हो जायेगा। यह खतरा भाजपा और सपा में सबसे अधिक दिख रहा है।

by Ran Vijay Singh