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मुलायम के करीबी बलराम यादव को कभी अखिलेश ने किया था बर्खास्त, क्या फिर देंगे मौका या खत्म होगा राजनीतिक कैरियर

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी पूर्व मंत्री बलराम यादव का एमएलसी कार्यकाल खत्म हो गया है। समथर्कों के बीच बाबूजी के नाम से प्रसिद्ध बलराम को राजनीति का चाणक्य कहा जाता है लेकिन कभी अखिलेश ने उन्हें अपने मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया था। बलराम के पुत्र लगातार तीन बार से विधायक हैं। ऐसे में चर्चा इस बात की है कि क्या अखिलेश यादव उन्हें फिर एमएलसी बनाएंगे अथवा अब यह उनके राजनीतिक जीवन का अंत है।

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प्रतीकात्मक फोटो

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पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. एक दौर था जब पूर्व मंत्री बलराम यादव अमर सिंह के बाद मुलायम सिंह के करीबियों में दूसरे नंबर पर आते थे। मुलायम जब भी सत्ता में आये उन्हें मंत्री पद जरूर दिया। अखिलेश के कार्यकाल में भी उन्हें मंत्री बनाया गया लेकिन वर्ष 2016 में उन्हें अखिलेश यादव ने मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया था। उस समय बलराम फूटकर रोये थे और मुलायम के दबाव उन्हे दोबारा मंत्री बना दिया गया था। अब बलराम यादव का एमएलसी कार्यकाल भी खत्म हो गया है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अखिलेश उन्हें फिर एमएलसी बनाएंगे या फिर यह उनके राजनीतिक कैरियर का अंत है। कारण कि जिस अतरौलिया सीट से बलराम विधायक चुने जाते थे उस सीट से उनके पुत्र संग्राम यादव लगतार तीसरी बार विधायक है।

बता दें कि बलराम यादव ने वर्ष 1971 से राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। बलराम यादव पहली बार 1971 में अतरौलिया से ब्लाक प्रमुख चुने गए थे। 1980 में विधानसभा का पहली बार चुनाव लड़ने वाले बलराम यादव को हार का सामना करना पड़ा। 1985 में विधानसभा के चुनाव में पहली बार चुनाव जीते और जीत का यह सिलसिला लगातार 1996 तक चलता रहा। 1996 में बसपा प्रत्याशी विभूति निषाद से चुनाव हार गए। 1993 में मुलायम कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहे बलराम यादव पर करोड़ो रूपए के आयुर्वेद घोटाले का भी चार्ज लगा।

वर्ष 1998 में समाजवादी पार्टी ने आजमगढ़-मऊ सीट से विधान परिषद सदस्य नामित किया। एमएलसी रहते 2002 का चुनाव लड़कर जीतने वाले बलराम यादव को मुलायम कैबिनेट में शामिल किया गया था। 2007 के विधानसभा चुनाव में पुनः हार का सामना करना पड़ा। 2012 की अखिलेश सरकार में बलराम यादव को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अपने 51 वर्ष के राजनैतिक कैरियर में बलराम यादव को छह बार विधायक और तीन बार एमएलसी बने। वर्ष 2016 बलराम यादव के राजनीतिक जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।

बलराम ने वर्ष 2016 में शिवपाल यादव के साथ मिलकर कौमी एकता दल का विलय सपा में कराया था। इससे बाद ही समाजवादी कुनबे में विद्रोह शुरू हुआ। परिवार में बवाल बढ़ा तो उसकी आंच से बलराम भी नहीं बच पाए और अखिलेश यादव ने उन्हें मंत्रीमंडल से बर्खास्त कर दिया। इसके बाद बलराम यादव फूटकर रोये थे। यह अलग बात है कि मुलायम के दबाव में उन्हें दोबारा मंत्री बना दिया गया। वैसे इसके बाद पार्टी में बलराम को वह तरजीह नहीं मिली जो पहले मिलती थी। धीरे-धीरे दुर्गा यादव का प्रभाव पार्टी में बढ़ता गया और बलराम यादव दुर्गा के प्रभुत्व के आगे दबते गए। छह जुलाई 2022 को उनका एमएलसी का कार्यकाल पूरा हो गया। अब इसे बलराम के राजनीतिक जीवन का अंत माना जा रहा है। कारण कि वे जिस अतरौलिया सीट से विधायक चुने जाते थे उसी सीट से उनके पुत्र संग्राम तीन बार से लगातार विधायक है। जो परिस्थितियां में उसमें यह संभव नहीं दिखता कि सपा उन्हें फिर एमएलसी बनाएगी।