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धर्म परिवर्तन कराने पर मौलाना जमील को 10 साल कैद की सजा, पीड़ित को मिलेगा पांच लाख

बलरामपुर में महिला और उसके चार बच्चों का अपहरण कर धर्म परिवर्तन कराया गया। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। धर्म परिवर्तन के मामले में यूपी में यह कोर्ट का पहला फैसला है।

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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

महिला और उसके बच्चों का मंतातरण कराने के ममाले में सुनवाई पूरी हुई। आरोपी मौलाना मोहम्मद जमील पर महिला और उसके चार बच्चों का अपहरण कर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप सिद्ध हुआ।


बलरामपुर जिला जज लल्लू सिंह ने आरोपी मौलाना मोहम्मद जमील को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। उस पर कारावास के साथ ही 50 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने पीड़ित विष्णु को 5 लाख रुपये प्रतिकर देने का आदेश दिया है।


12 अप्रैल 2022 को हुआ था अपहरण
जरवा थाना क्षेत्र के हलौरा निवासी विष्णु की पत्नी और बच्चों का 12 अप्रैल को अपहरण कर लिया गया था। विष्णु ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी गांव के ही मौलाना जमील के घर मजदूरी करने जाती थी। मौलाना ने बहला-फुसलाकर पत्नी और उसके चार छोटे बच्चों का धर्म परिवर्तन करा दिया।


नाबालिग लड़कों का ***** करा बदला नाम
जमील ने विष्णु के दो नाबालिग बेटों का ***** कराकर नाम बदल दिया था। दो नाबालिग बेटियों का भी अपने धर्म के मुताबिक नाम बदल दिया था। जीमल ने विष्णु के बेटे का मदरसे में दाखिला कराया। पिता के नाम पर अपना नाम दर्ज करा दिया।


12 जून को पुलिस ने दर्ज किया था मुकदमा
विष्णु महीनों थाने और अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काटता रहा। नौ जून को बच्चों का धर्म परिवर्तन कराया गया। जब यह जानकारी पुलिस को हुई तो उसने 12 जून को नामजद FIR दर्ज कर लिया।


जमील के घर से बरामद हुई महिला और बच्चे
जरवा पुलिस जीमल के घर पर छापा मारा तो महिला और बच्चे बरामद हो गए। पुलिस ने दोनों बेटों का मेडिकल कराया। मेडिकल में बच्चों का ***** कराकर धर्म परिवर्तन की पुष्टि हुई थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की।


पांच गवाहों ने न्यायालय में की गवाही
जिला एवं सत्र न्यायालय में अभियोजन की ओर से पांच गवाहों का बयान दर्ज कराया गया। गवाहों के बयान से धर्म परिवर्तन के आरोप की पुष्टि हुई।

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कोर्ट ने माना- सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध कार्य
जिला शासकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह ने बताया कि कोर्ट ने तर्कों को सुना। कोर्ट ने माना कि सामूहिक धर्म परिवर्तन किया गया है। इसे सामाजिक समरसता और सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध बताया।

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धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत मिली सजा
जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अभियुक्त को धर्म परिवर्तन अधिनियम के तहत 10 वर्ष कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। यह प्रदेश का पहला मामला है जिसमें इस अधिनियम के तहत सजा सुनाई गई है। मुकदमा दर्ज होने के सात माह के भीतर आरोपी को सजा सुनाई गई है।