
बड़वानी. बड़वानी जिले को प्राकृतिक संसाधन व धरोहरों के रूप में प्रकृति का वरदान है। दक्षिण में सतपुड़ा पर्वतमाला रक्षा कर रही है तो उत्तर में नर्मदा नदी सर्वस्व लुटा रही है। इन्हीं विशेषतओं पर इतिहासकारों ने बड़वानी को निमाड़ का पेरिस नाम दिया है। यह नहरों की बदौलत आबाद हुआ। बड़वानी से पांच किमी दूर सजवानी के मोहन राठौड़ की जुबानी-खुशी है कि गांव में नहर आ गई। किसान पूरे साल फसल ले रहे हैं। कपास, मिर्च के अलावा सब्जियों की बंपर पैदावार हो रही है। यहां की उपज इंदौर, भोपाल, दिल्ली-मुंबई तक जा रही है। बड़वानी की यह तस्वीर जनजाति बाहुल्य बड़वानी व राजपुर विधानसभा क्षेत्र में लोगों के जन मानस को महसूस करने किए दौरे में सामने आई।
तेजी से हुआ विकास पर खत्म नहीं हुईं परेशानियां
राजघाट पर राजेश कानूनगो ने कहा, पांच साल में बड़वानी का विकास तेज गति से हुआ। हाल ही में सरकार ने राजघाट से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक क्रूज चलाने के पायलेट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह पर्यटन के द्वार खोलेगी। पूरा बड़वानी इसी तरह खुशहाल नहीं है। यहां कमियां और परेशानियां भोगने वाले भी बड़ी संख्या में हैं। राजघाट पर ही मेडिकल स्टोर्स संचालक दिनेश गुप्ता ने कहा, शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छी नहीं है। पेट्रोप पंप कर्मचारी जगदीश मारू बोले-युवाओं के पास रोजगार नहीं है। दवाना में मुद्रा लोन के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों का दर्द
राजपुर के सुभाष कुशवाह ने कहा, महंगाई बहुत है। अंजड़ बस स्टैंड पर यादव समाज अध्यक्ष हुकुम यादव बोले, किसानों को उपज का सही मोल नहीं मिल रहा। गुजरात में नर्मदापर बने सरदार सरोवर बांध में जलभराव से बड़वानी, अंजड, ठीकरी तहसील की 30 गांव डूब क्षेत्र के रूप में चिह्नित की। अब तक विस्थापन व पुनर्वास पूरा नहीं हुआ। 40 साल से लोग नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथ संघर्ष कर रहे हैं।
5 साल से टीन शेड में रह रहे कई परिवार
धनोरा के शांतिलाल यादव बताते हैं, मेरे गांव में 70% लोग बोरलाय पुनर्वास स्थल पर रहने चले गए। 30% पुरानी आबादी में रह रहे हैं। डूब प्रभावितों के लिए सरकार ने 5.80 लाख के विशेष पैकेज की घोषण की। चेहरे देखकर लाभ दिया। कई को भूखंड और पट्टे मिले, पर आर्थिक मदद नहीं मिली। अंजड़ में अस्थाई पुनर्वास स्थल (टीनशेड ) में 30 परिवार पांच साल से रह रहे हैं। पिपलूद के अंतिम मधुकर कहते हैं, जब प्रशासन ने हमें परिवार सहित रात में उठाकर यहां लाकर पटक दिया। टीनशेड ही अब हमारा घर है। प्लॉट और मुआवजा नहीं मिला।
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Published on:
16 Jun 2023 03:20 pm
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