
बागपत। जनपद में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। जहां लोग इसे चमत्कार बता रहा हैं तो वहीं डॉक्टरों ने इसे मेडिकल साइंस के तौर पर देखा है। दरअसल, मामला खट्टा प्रहलादपुर गांव का है। जहां तीन दिन के नवजात की मौत के बाद गमजदा परिजन उसे दफनाने के लिए जंगल में ले गए। गड्ढा खोदने के बाद जैसे ही मासूम के शव को उसमें रखने लगे तो वैसे ही उसकी किलकारी गूंज उठी और शरीर में हरकत होने लगी। वहीं जब परिजनों ने कफन हटाया तो बच्चा जिवित था। जिसके बाद परिजन उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर गए। हालांकि करीब दो घंटे बाद बच्चे की फिर से मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार मेरठ के एक प्राइवेट अस्पताल में बागपत के खट्टा प्रहलादपुर गांव निवासी सोनू की पत्नी ने शुक्रवार को बेटे को जन्म दिया था। शाम को परिजन जच्चा-बच्चा को घर ले आए। लेकिन, शनिवार सुबह अचानक बच्चे की तबियत बिगड़ गई। जिसके बाद परिजन बच्चे को गांव स्थित डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद घर में मातम छा गया। परिजन मासूम के शव को दफनाने के लिए जंगल लेकर गए।
उधर, बच्चे को दफनाने के जब गड्ढे में शव को रखा जा रहा था तो वह हरकत करने लगा और किलकारी मारकर रोने लगा। जिसे सुनकर परिजन खुशी से उछल पड़ और बच्चे को घर लेकर आ गए। इसके बाद वह उसे फिर से डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे। हालांकि करीब दो घंंटे बाद मासूम ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह किसी चमकत्कार से कम नहीं था। जिस तरह बच्चे में दोबारा सांस आ गई, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।
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उधर, मामले में सीएमओ डॉ आरके टंडन का कहना है कि नवजात की मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। एपिनिया बीमारी में बच्चे कुछ देर के लिए सांस रोक लेते हैं। जो घटना हुई है उसमें भी ऐसा ही हो सकता है, जिसके कारण पहले बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया हो और बाद में फिर सांस चल गई हों। इसके अलावा निमोनिया व ब्लड में शुगर का लेवल कम होने से भी नवजात की जान जा सकती है। किस चिकित्सक ने उसका उपचार किया, इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।
Updated on:
05 Jul 2020 02:44 pm
Published on:
05 Jul 2020 02:42 pm
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