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Lockdown: अधिकारियों की चौखट पर पहुंचे 35 मजदूर, बोले- साहब घर भिजवा दो… बच्चे राह देखते हैं…

Highlights - सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अधिकारियों से मिल मजदूर - बिहार के रहने वाले 35 मजदूरों मांग रहे घर जाने की परमिशन - अधिकारियों ने दिया जल्द ही घर भेजने का आश्वासन

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बागपत

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lokesh verma

May 04, 2020

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बागपत. कोरोना महामारी के बीच दिहाड़ी मजदूरों को खाने के लाले पड़ गए हैं। दूसरे राज्यों से बागपत में परिवार संग मजदूरी करने आए इन मजदूरों के पास अब एक धेला भी नहीं है। इस कारण अब ये मजदूर अपने घरों को लौटना चाहते हैं, लेकिन कोई बंदोबस्त नहीं होने के कारण इन मजदूरों ने तहसील बड़ौत पहुंचकर जमकर हंगामा किया और अधिकारियों से घर पहुंचाने की गुहार लगाई है। वहीं, परिवार दूर यहां रह रहे मजदूरों ने कहा कि साहब घर भिजवा दो बच्चे रोज राह देखते हैं। अधिकारियों ने पूर्व की तरह इन्हें आश्वासन तो दे दिया है, अब देखने वाली बात ये होगी कि कब तक ये घर जा पाएंगे।

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दरअसल, बागपत की बड़ौत तहसील स्थित एक कॉलोनी में बिहार के औरैया के रहने वाले 35 मजदूर काफी समय से घरों का निर्माण कार्य कर रहे थे। कोरोना महामारी के चलते जब से लॉकडाउन की घोषणा हुई तब से इनके सामने रोजी-रोटी की परेशानी आनी शुरू हो गई है। लॉकडाउन में घरों के निर्माण कार्य पूरी तरह से बंद होने के कारण इनकी मजदूरी भी खत्म हो गई है। पीड़ित मजदूरों ने बताया कि उन्होंने थोड़ा बहुत पैसा जोड़कर रखा था, जो लॉकडााउन-1 और लॉकडाउन-2 में खत्म हो गया है। सोचा था लॉकडाउन-2 के बाद राहत मिलेगी, लेकिन फिर से लॉकडाउन-3 शुरू हो गया। अब उनके पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि वह बच्चों को खाना खिला सकें। इस लिए अब वह लाचार हैं और अपने घरों को वापस जाना चाहते हैं।

आज यानी सोमवार को एकत्रित होकर सभी 35 मजदूर बड़ौत तहसील पहुंचे और अधिकारियों से वापस घर भेजने की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने पहले शांतिपूर्वक तरीके से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपनी आवाज बुलंद की। जब इससे भी बात नहीं बनी तो मजबूरी में हंगामा भी किया, लेकिन उन्हें आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ। मजदूरों ने बताया कि वह कई बार अधिकारियों से उन्हें वापस घर भिजवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई बंदोबस्त नहीं हो पा रहा है।

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