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वीर हनुमान के दर्शन करने आए श्रद्धालु की मौत, घर में मचा कोहराम, रोपवे चालू होता तो बच सकती थी जान

आराध्य देव वीर हनुमानजी के दर्शनों के लिए पहुंचे एक श्रद्धालु की सीने में दर्द होने के बाद तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे चारपाई पर लेटाकर नीचे लाए और निजी वाहन से चिकित्सालय ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।

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बगरू

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Santosh Trivedi

Jun 26, 2022

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सामोद(जयपुर)। आराध्य देव वीर हनुमानजी के दर्शनों के लिए सीढि़यां चढ़कर दुकान से प्रसाद खरीदने के दौरान शनिवार सुबह एक श्रद्धालु की सीने में दर्द होने के बाद तबीयत बिगड़ गई। परिजन व मंदिर कार्यकर्ता उसे चारपाई पर लेटाकर नीचे लाए और निजी वाहन से चौमूं के निजी चिकित्सालय ले गए, जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद श्रद्धालुओं ने सरकार के खिलाफ रोष जताया। साथ ही कहा कि यदि रोप-वे चालू होता तो श्रद्धालु की जान नहीं जाती।

सीने में दर्द की शिकायत हुई....
जानकारी के अनुसार नवोडी बागडो़ं की ढाणी, अमरपुरा निवासी सीताराम शर्मा (53) पुत्र भोलूराम शनिवार सुबह सात बजे भतीजे किशन के साथ आराध्य देव वीर हनुमानजी के दर्शन करने सामोद पहाड़ी पर गया था। वह सीढ़ियों से चढ़कर मन्दिर के पास स्थित दुकान पर प्रसाद लेने के लिए रुक गया। इस दौरान उसके सीने में दर्द की शिकायत हुई। दुकानदारों व भतीजे ने उसे पास ही चारपाई पर लेटा दिया। भतीजे किशन ने परिजनों को इसकी सूचना दी, जिस पर परिजन श्रवण कुमार पहुंचा, लेकिन तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन, दुकानदारों व मन्दिर प्रबंध समिति के कार्यकर्ताओं के सहयोग से सीताराम को चारपाई की सहायता से सीढ़ियों से नीचे उतार लाए। इसके बाद निजी वाहन से इलाज के लिए चौमूं के निजी चिकित्सालय ले गए, जहां चिकित्सकों ने सीताराम शर्मा निवासी नवोडी बागडों की ढाणी अमरपुरा को मृत घोषित कर दिया।

वीर हनुमानजी में उनकी विशेष आस्था थी
मृतक सीताराम के भतीजे विनोद कुमार ने बताया कि उसके चाचा सीताराम कालाडेरा स्थित एक लोहे की ढलाई फैक्ट्री में लेखा संबंधी काम करते थे। वीर हनुमानजी में उनकी विशेष आस्था थी। वह प्रत्येक शनिवार को वीर हनुमानजी के दर्शन करने आते थे। शनिवार को भी दर्शनों के लिए पहाड़ी स्थित वीर हनुमान मंदिर में गए थे, लेकिन दर्शन करने से पहले ही प्रसाद की दुकान पर ही तबीयत खराब हो गई।

घर में मचा कोहराम, बाजार रहे सूने....
सीताराम की मौत के खबर उसके गांव में पहुंचने पर उसके घर पर बड़ी तादाद में लोग जमा हो गए। शोक में बाजार बंद हो गए। जैसे ही उसका शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। सीताराम की बूढ़ी मां लक्ष्मी देवी का रो-रो कर बुरा हाल था। वहीं मृतक की पत्नी सरजू देवी बेसुध हो रही थी। सीताराम के दोनों बेटों को आसपास के लोग ढाढ़स बंधा रहे थे। गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

सरकार व प्रशासन के खिलाफ निकाला गुस्सा....
इधर, मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने घटना के बाद रोष जताया। इनका कहना था कि सीताराम की तबीयत सुबह 7 बजे खराब हुई थी। उसे चारपाई पर लेटाकर करीब 8.30 बजे सीढ़ियों से नीचे उतार कर लाए। इस दौरान चौमूं तक ले जाने में करीब दो घंटे का समय लगा, जिससे सीताराम को समय पर उपचार नहीं मिल सका। यदि रोपवे चालू होता तो तीन मिनट में पहाड़ी से नीचे ले आते और हो सकता है। समय रहते उसे उपचार मिल जाता तो सीताराम की जान बचाई जा सकती थी।