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बिना मांगे गौ माता की कृपा से रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को मिला पद्मश्री

Munna Master gets Padma Shri :- रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को पहले पहल जब पद्म पुरस्कार मिलने की सूचना दी उस समय वे बगरू स्थित गोशाला में भजन गा रहे थे। पुरस्कार को उन्होंने अकल्पनीय बताते हुए कहा कि यह गौ माता की सेवा और उनकी कृपा का ही परिणाम है कभी सपने में भी इस तरह पुरस्कार के बारे में सोचा तक नहीं था। यह मेरे सहित समस्त भारतवासियों का सम्मान है।

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बगरू

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Narottam Sharma

Jan 25, 2020

बिना मांगे गौ माता की कृपा से रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को मिला पद्मश्री

बिना मांगे गौ माता की कृपा से रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर को मिला पद्मश्री

बगरू. बगरू के संगीतज्ञ रमजान खान उर्फ मुन्ना मास्टर श्याम प्रभु और गोभक्ति के भजनों से दिन की शुरुआत और गो रक्षा संकीर्तन से रातभर भक्तों को मंत्रमुग्ध करते हैं। उन्हें पहले पहल जब पद्म पुरस्कार मिलने की सूचना मिली उस समय वे बगरू स्थित गोशाला में भजन गा रहे थे। पुरस्कार को उन्होंने अकल्पनीय बताते हुए कहा कि यह गौ माता की सेवा और उनकी कृपा का ही परिणाम है कभी सपने में भी इस तरह पुरस्कार के बारे में सोचा तक नहीं था। यह मेरे सहित समस्त भारतवासियों का सम्मान है।

बेटे के नियुक्ति विवाद से चर्चा में
उल्लेखनीय है कि रमजान के बेटे फिरोज खान के बीएचयू में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में सहायक आचार्य पद पर नियुक्ति पर उनके धर्म को लेकर मुद्दा बनाया गया था।

घर में कृष्ण की तस्वीरें, गोशाला में सेवा
रमजान के पिता संगीत विशारद मास्टर गफूर खां गोभक्त रहे वे गो ग्रास के बाद ही भोजन लेते थे। उनके घर की दीवारों पर भगवान कृष्ण की तस्वीरें लगी हैं। रमजान 15 वर्षों से गोशाला से जुड़े हैं और रोज कई घंटे गोसेवा में गुजारते हैं। गोशाला के मंदिर में गौरक्षा हरिनाम संकीर्तन करतेे हैं। उन्हें सुंदरकांड, हनुमान चालीसा व कई भजन कंठस्थ हैं। रमजान ने श्याम सुरभि वंदना शीर्षक से भजन पुस्तिका भी लिखी है।

संस्कृत से जुड़ा पूरा परिवार
रमजान के चार पुत्रों वकील, शकील, फिरोज व वारिस ने संस्कृत विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की है। रमजान की छोटी बेटी का जन्म दीपावली पर होने से उसका नाम लक्ष्मी रखा और बड़ी बेटी का नाम अनीता है। पूरा परिवार बगरू में दो कमरों के मकान में रह रहा है।