
फाइल फोटो पत्रिका
बहराइच में एक महिला की मौत से जुड़े मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अदालत में पेश न किए जाने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने साक्ष्य प्रस्तुत करने में लापरवाही मानते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।
बहराइच जिले के रामगांव क्षेत्र की रहने वाली सुमरिता देवी से जुड़ा है। जिनकी इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। 28 मई 2007 को उनका पोस्टमार्टम कराया गया था। इस घटना के संबंध में रामगांव थाने में राज्य बनाम रामचंद्र के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 452 और 304 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत में चल रही है। अदालत ने पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. सुनील को गवाही के लिए कई बार समन जारी किए। लेकिन वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए 12 जनवरी 2026 को अदालत ने सीएमओ को निर्देश दिया कि संबंधित चिकित्सक को द्वितीय साक्ष्य के माध्यम से अदालत में पेश कराया जाए। इसके बावजूद चिकित्सक की ओर से कोई उपस्थिती दर्ज नहीं कराई गई। 30 जनवरी को अदालत ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार को नोटिस जारी कर 17 फरवरी को स्पष्टीकरण सहित न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया था।
मंगलवार को हुई सुनवाई में सीएमओ स्वयं भी अदालत में पेश नहीं हुए। इसे अदालत ने गंभीर लापरवाही माना।
न्यायालय ने साक्ष्य प्रस्तुत करने में हीलाहवाली को आधार बनाते हुए सीएमओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही उन्हें समन जारी कर 25 फरवरी को अदालत में उपस्थित होने के लिए तलब किया गया है।
अदालत के इस आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई है। अब अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी। जहां मामले की आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Published on:
18 Feb 2026 08:58 am
