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पद्मावती फिल्म के मुद्दे पर सुनिए क्या बोल गईं मंत्री अनुपमा जायसवाल

अब ब्राह्मण समाज ने कहा है कि फिल्म का रिलीज रोकने वालों को ब्राह्मण समाज करारा जवाब देगा।

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Anupama Jayaswal

Anupama Jayaswal

बहराइच. फिल्म निर्माता एवं निर्देशक संजय लीला भंसाली द्वारा चित्तौड़ गढ़ राज्य की महारानी रानी पद्मावती के इतिहास पर बनाई गई फिल्म पद्मावती का पूरे देश में जमकर विरोध किया जा रहा है। जहां छत्रिय समाज ने इस फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज न होने देने की धमकी दी है, वहीं अब ब्राह्मण समाज ने कहा है कि फिल्म का रिलीज रोकने वालों को ब्राह्मण समाज करारा जवाब देगा।

इतिहास से छेड़छाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं: छत्रिय समाज

यही नहीं, इस विवादित फिल्म में रानी पद्मावती की नायिका का रोल अदा करने वाली बालीबुड स्टार अभिनेत्री दीपिका पादुकोंण के खिलाफ भी जगह-जगह तीखे स्वर में विरोध प्रदर्शन की आवाजें लगातार गूंज रही हैं। छत्रिय समाज के लोगों का आरोप है कि दर्शकों की भीड़ जुटाने के साथ ही चन्द दिनों में अपनी फि़ल्म को सुपरहिट कराकर मोटी रकम कमाने की मंसा से फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली द्वारा जानबूझकर रानी पद्मावती के चरित्र और इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का काम किया गया, जबकि रानी पद्मावती का इतिहास सर्व विदित है कि चित्तौडग़ढ़ के राजा रतन सिंह की मौत के बाद रानी पद्मावती ने अलाउद्दीन खिलजी के हरम में अपनी आबरू नीलाम करने के बजाय 16 हजार अन्य रानियों के साथ आग में जिन्दा जलकर जौहर करने का काम किया था।

सेंसर बोर्ड पर छोड़ देना चाहिए मामला

छत्रिय समाज के लोगों का आरोप है कि इस मामले में अपने व्यावसायिक फायदे के लिये रानी पद्मावती के इतिहास के साथ फिल्म निर्माता द्वारा की गयी छेड़छाड़ किसी कीमत पर हिन्दू समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। इस मसले पर योगी सरकार की बेसिक शिक्षा एवं बाल विकास मंत्री अनुपमा जायसवाल से जब पत्रिका ने बातचीत की तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हमनें फि़ल्म को तो नहीं देखा, लेकिन जो बातें सुनाईं पड़ रही हैं कि फिल्म में रानी पद्मावती के इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई तो ये बहुत गलत बात है। रानी पद्मावती का इतिहास किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों में विरोध की ज्वाला भड़क रही है, उससे नहीं लगता की फिल्म किसी कीमत पर देश में प्रदेश में रिलीज हो पायेगी।

संवेदनशील मुद्दे को सेंसर बोर्ड के ऊपर छोड़ देना चाहिए

उन्होंने कहा कि मेरी राय है कि इस संवेदनशील मुद्दे को सेंसर बोर्ड के ऊपर छोड़ देना चाहिए, जो फिल्म को देखने के बाद उसमें राजपूताना घराने से जुड़े सही तथ्यों को पेश कर रानी पद्मावती के इतिहास को फिल्म के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत करने का काम करे, जो तस्वीर कहीं न कहीं समाज में हर किसी के लिये प्रेरणादाई का स्रोत साबित होगा।