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75 प्रतिशत से कम अंक वालों को नहीं मिल रहा प्रवेश

स्कूलों के अभाव में आठवीं से पास होकर नवमीं और 10 वीं से पास होकर 11वीं में पहुंचे विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए काफी  भटकना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में छात्राओं के लिए दो और छात्रों के लिए महज एक उत्कृष्ट स्कूल स्कूल ही ऐसा है जहां वे हायर सेकंडरी की पढ़ाई कर सकते हैं।

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Chhindwara Online

Jul 05, 2015

balaghat news

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बालाघाट/कटंगी. कटंगी विकासखंड में हाई स्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों की कमी खल रही है। स्कूलों के अभाव में आठवीं से पास होकर नवमीं और 10 वीं से पास होकर 11वीं में पहुंचे विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए काफी भटकना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में छात्राओं के लिए दो और छात्रों के लिए महज एक उत्कृष्ट स्कूल स्कूल ही ऐसा है जहां वे हायर सेकंडरी की पढ़ाई कर सकते हैं। इस स्कूल में भी 75 प्रतिशत अंक आने वाले छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जा रहा है। यहां सीट भी फुल हो गई है। इस कारण सैकड़ों छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंचित नजर आ रहे है।

भटक रहे छात्र

उल्लेखनीय है कि शहर के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल को जब उत्कृष्ठ स्कूल का दर्जा दिया गया है। तब से इस स्कूल में सिर्फ 75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थियों को ही एडमिशन दिया जा रहा है। इससे कम प्रतिशत अंक पाने वाले बालक छात्र एडमिशन के लिए भटक रहे हैं।

छात्राओं के पास विकल्प

अच्छे प्रतिशत अंक हासिल करने वाली छात्रों को अगर उत्कृष्ठ स्कूल में एडमिशन नहीं मिलता तो इनके पास शासकीय
कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एक विकल्प है, लेकिन बालक छात्र अगर उन्होंने अच्छे अंक प्राप्त भी कर लिए है और उत्कृष्ठ में एडमिशन नहीं मिलता तो खास तौर पर गरीब तबके के छात्रों को पढ़ाई छोडऩे के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है। एडमिशन नहीं मिलने के कारण पढ़ाई छोडऩे वाले छात्रों की संख्या पर नजर डाली जाए तो बीते चार सालों में करीब दो हजार छात्रों की एक चौकाने वाली जानकारी सामने आती है।
गौरतलब हो कि शहर और इससे सटे करीब एक दर्जन गांवों के विद्यार्थियों को कम प्रतिशत होने की वजह से उत्कृष्ठ स्कूल में एडमिशन नहीं मिलने के कारण उनका जीवन प्रभावित हो रहा है और वे पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। सबसे बुरा प्रभाव कटंगी शहर के अलावा खजरी, चिकमारा, खैरलांजी, पाथरवाड़ा, सेलवा, बडग़ांव, आगरवाड़ा, सिंगोड़ी, सांवगी, उमरी, चिरचिरा, भजियापार व अन्य गांव के छात्र-छात्राओं के हैं। इन गांवों के
सैकड़ों विद्यार्थी एडमिशन के लिए भटक रहे हैं।

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