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इस एक मंत्र का जाप करने से आपकी दिल की हर इच्छा हो जाएगी पूरी

इस एक मंत्र का जाप करने से आपकी दिल की हर इच्छा हो जाएगी पूरी

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dhan varsha

इस एक मंत्र का जाप करने से आपकी दिल की हर इच्छा हो जाएगी पूरी

बालाघाटः हर इंसान का सपना होता है कि, वह एक सफल जीवन व्यतीत करे। उसके पास सुविधा की हर चीज़ हो जिससे वह अपनी हर ख्वाहिश पूरी कर सके। लेकिन आमतौर पर सभी लोगों की इच्छा पूरी हो, ऐसा संभव नहीं है। जिन लोगों का भाग्य प्रबल होता है, उन्हें थोड़ी ही मेहनत करने पर जीवन में बहुत कुछ मिल जाता है, लेकिन कई लोग जीवनभर सिर्फ परिश्रम करने में ही गुज़ार देते हैं, लेकिन वह अपनी ज़रूरतों को भी पूरा नहीं कर पाते। लेकिन, इस बात से आप सभी वाकिफ होंगे कि, जिससे देवों के देव महादेव प्रसन्न हो जाएं उनकी फूटी से फूटी किस्मत बदलते देर नहीं लगती। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिषों में शामिल पंडित श्यामनारायण व्यास ने बताया कि, बिगड़े हुए भाग्य को सवारने का सबसे आसान तरीका है भोले बाबा को प्रसन्न कर लो। भदवान शिव अपने भक्तों से थोड़ी सी भक्ति करने पर ही मान जाते हैं। इसी कारण वह भोले बाबा के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे बढ़िया दिन कहा जाता है। पंडित शास्त्री ने बताया कि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भगवान शंकर का विशेष पूजन करने से हर प्रकार के दुखो का नाश हो जाता है। मान्यता के अनुसार, भगवान शंकर के कुछ मंत्रों का जाप करने मात्र से भगवान शिव की कृपा प्राप्त कि जा सकती है और आप जिंदगी में बहुत आगे निकल सकते हैं लेकिन वह मंत्र बहुत कम लोग ही जानते हैं, तो आज हम आपको बताते हैं वह मंत्र के बारे में।

मनोवांछित फल पाने का मंत्र

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय

अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम् अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्

स्वास्थ जीवन पाने का मंत्र

सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम् भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये

कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे