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MP में पेट्रोल और माचिस लेकर कलेक्ट्रेट पहुंची महिला, आत्मदाह की दी चेतावनी

MP News: मध्य प्रदेश में कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक पीड़ित महिला पेट्रोल और माचिस लेकर जनसुनवाई में पहुंच गई और आत्मदाह की चेतावनी देने लगी।

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Woman Reaches Collectorate with Petrol and Matches during public hearing MP News

Woman Reaches Collectorate with Petrol and Matches (फोटो- वायरल वीडियो स्क्रीनशॉट)

MP News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक हैरान कर देना वाला मामला सामने आया। यहां हर हफ्ते होने वाली जनसुनवाई को आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का मंच बताया जाता है, लेकिन हकीकत इससे कितनी अलग है, इसका दर्दनाक उदाहरण इस बार सामने आया। कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक पीड़ित महिला पेट्रोल और माचिस लेकर जनसुनवाई में पहुंच गई। कार्रवाई न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। मामला मंगलवार का है।

एक साल से अपने काम को लेकर चक्कर काट रही महिला

वारासिवनी इलाके के सिकंद्रा क्षेत्र के निवासी नौशाद कुरैशी के अनुसार वह पिछले एक साल से अपनी जमीन के सीमांकन के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है। जनसुनवाई में कई बार आवेदन देने और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। महिला के समक्ष विडंबना यह थी कि जिस तंत्र को आमजन की सुनवाई के लिए बनाया गया है, वहीं से उनकी शिकायत निपटाई जा रही है। यह घटना केवल उस महिला की परेशानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो कागजों में संवेदनशील और जमीनी स्तर पर सुस्त नजर आती है।

जमीन के सीमांकन को लेकर है विवाद

पीड़िता का आरोप है कि उनके पड़ोसी द्वारा बिना सीमांकन कराए ही मकान का निर्माण किया जा रहा है, उनकी जमीन प्रभावित हो रही है। सवाल उठाया कि बिना सीमांकन के निर्माण कैसे जारी है और यदि शिकायतें लगातार दी जा रही थी, तो प्रशासन अब तक मौन क्यों रहा। महिला जब अपनी पीड़ा मीडिया के सामने रखने लगी, तब जाकर अधिकारी अपने एसी कक्ष से बाहर आए और बातचीत की। एडीएम पांडे और भू अभिलेख अधिकारी ने महिला के समक्ष स्थानीय अधिकारियों से चर्चा की। बुधवार तक सीमांकन कार्य संपादित करने की बात कही। इस वाक्ये की तस्वीर ने प्रशासन की प्राथमिकताओं को भी उजागर किया कि क्या आम नागरिक की आवाज तब तक अनसुनी रहती है, जब तक वह सुर्खियां न बन जाए।

महिला सशक्तिकरण की कड़वी सच्चाई

एक ओर सरकार और प्रशासन महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करते हैं, योजनाओं का प्रचार करते हैं। वहीं दूसरी ओर एक महिला को अपनी ही जमीन के अधिकार के लिए आत्मदाह जैसी चरम चेतावनी देने पर मजबूर होना पड़ा। गणमान्यों के अनुसार यह घटना उन दावों पर सीधा कटाक्ष है, जो मंचों और विज्ञापनों तक सीमित हैं। एक महिला को न्याय पाने के लिए अपनी जान की बाजी लगाने की नौबत आना, प्रशासनिक विफलता का प्रत्यक्ष उदाहरण बताया जा रहा है। इधर इस मामले में वारासिवनी एसडीएम कार्तिकय जायसवाल ने मामले को पुराना बताते हुए बुधवार तक सीमांकन कराने का आश्वासन दिया है।

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