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आजादी के 77 वर्ष बाद भी नसीब नहीं पक्की सडक़

पक्की सडक़, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को तरस रहे सीताडोंगरी के वासी

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पक्की सडक़, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को तरस रहे सीताडोंगरी के वासी

पक्की सडक़, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को तरस रहे सीताडोंगरी के वासी

बालाघाट. आजादी के 77 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को पक्की सडक़ मुहैया नहीं हो पाई है। हर बारिश में कच्चा मार्ग कीचड़ युक्त होकर दलदल बन जाता है। इसके बाद ग्रामीण गांव में ही कैद होने मजबूर हो जाते हैं या फिर लंबा घेरा कर उन्होंने बाहर गांव में आवागमन करना पड़ता है। मामला परसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भालेवाड़ा के ग्राम सीताडोंगरी का है। यहां के ग्रामीणों का जीवन सुविधाएं नहीं होने से काफी तकलीफों भरा बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार सडक़ के अलावा गांव में बिजली, शुद्ध पानी, स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी बेजा अभाव है। इतने वर्षो भी बाद भी गांव की तस्वीर बदल नहीं पाई है।
ग्रामीणों ने बताया कि सीताडोंगरी गांव भालेवाड़ा पंचायत से डेढ़ किमी दूर वहीं डोंगरबोड़ी से भी डेढ़ किलो मीटर दूर है। दोनों ही तरफ से पहुंच मार्ग का खस्ता हाल हो चुके हैं। बताया गया कि ग्रामीण जन तो किसी तरह से कीचड़ से लतपत होकर आवागमन कर लेते हैं। लेकिन स्कूली बच्चों के लिए यह मार्ग अडंगा बन जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं। जिन्हें बारिश के दौरान करीब दो महिने गांव में ही कैद रहना पड़ता है।

15 साल पहले बना था मार्ग
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत भालेवाड़ा ने इस कच्चे मार्ग को 15 वर्ष पूर्व मिट्टी मुरुम से बनाया था। लेकिन उसके बाद से अब तक एक बार भी मरम्मती या मुरूमीकरण नहीं किया गया है। बताया गया कि भालेवाड़ा पंचायत के सीताडोंगरे में दो वार्ड 17 व 18 आते हैं। यहां करीब एक सैकड़ा परिवार निवासरत है। लेकिन इनके आवागन के लिए पक्की सडक़ नहीं बनाई जा रही है।

बीमार होने पर फजीहत
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षो से वे इसी कच्चे मार्ग से किसी तरह आवागमन करते आ रहे हैं। सबसे बुरी स्थित तब हो जाती है जब गांव में कोई बीमार हो जाता है। बताया गया कि कच्चे मार्ग के कारण गांव में एम्बुलैंस या कोई भी वाहन प्रवेश नहीं कर सकता है। ऐसे में किसी के चोटिल होने या प्रसव के दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ती है। प्रसूताओं को खाट में बैठाकर भालेवाड़ा तक लाना पड़ता है यहां से भी फिर वाहन से अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। कई बार देरी होने पर जच्चा व बच्चा के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पडऩे के हालात भी निर्मित हो जाते हैं।

मंत्री भी नहीं बनवा पाए सडक़
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले विधानसभा कार्यक्रम में परसवाड़ा क्षेत्र के विधायक रामकिशोर कावरे को मंत्री बनाया गया था। तब ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब तो उनके गांव की सडक़ बन ही जाती है क्योकि उनके क्षेत्र के विधायक मंत्री बनाए गए हैं। लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद वे एक सडक़ तक नहीं बनवा पाए। जबकि पंचायत और ग्रामीणों के माध्यम से कई बार सडक़ निर्माण की मांग की गई थी।
वर्सन
बारिश के दिनों में हमें बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। हमारे बच्चों को स्कूल जाने आने में भारी समस्या होती है। इन दिनों स्वास्थ्य सेवा से हमें वंचित रहना पड़ता है। गांव में कोई डॉक्टर वा एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। मरीजों को मुश्किल से उपचार मिल पाता है।
सदानंद, ग्रामीण जन

भालेवाड़ा से सीताडोंगरी मार्ग की स्वीकृति मिल चुकी है। बारिश के कारण कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया है। डेढ़ किमी सुदूर रोड बनाई जाएगी। वर्तमान स्तिथि को देखते हुए कोई भी वैकल्पिक सुधार नहीं किया जा सकता है।
संतोष बाघमारे, सचिव ग्रापं भालेवाड़ा

इस तरह का मामला मुझे मालूम नहीं है। सरपंच, सचिव से जानकारी लेकर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए निर्देशित करूंगी ।
ममता कुलस्ते, जनपद सीईओ बालाघाट