
आदमखोर बाघ
Tiger- मध्यप्रदेश के बालाघाट में दहशत का पर्याय बन चुका आदमखोर बाघ आखिरकार वन विभाग के शिकंजे में आ गया। 15 घंटों की मशक्कत के बाद उसे पकड़ा जा सका। आदमखोर बाघ को कान्हा पार्क की आठ सदस्ययी टीम ने ट्रैंकुलाइज कर
पिंजरे में कैद किया। अब उसे पहले सिवनी के पेंच में भेजा जा रहा है और फिर भोपाल वन विहार में भेज दिया जाएगा। बाघ के पकड़ में आ जाने के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली। पिंजरे में कैद आदमखोर बाघ को देखने के लिए हजारों ग्रामीण आ जुटे थे।
कटंगी वन परिक्षेत्र गोरेघाट सर्कल के कुड़वा गांव में किसान का शिकार करने वाले बाघ को सोमवार को सफलतापूर्वक पकड़ लिया गया। कान्हा नेशनल पार्क से डॉ. संदीप अग्रवाल के नेतृत्व में पहुंची टीम ने कई घंटे मशक्कत की तब जाकर उसे पकड़ा जा सका। पूरे अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों का हुजूम लगा रहा।
करीब एक पखवाड़े से कुड़वा सहित आसपास के क्षेत्रों में घूम रहे इस बाघ के कारण दहशत का माहौल बना हुआ था। बाघ ने किसानों के पांच मवेशियों को अपना निवाला बनाया। शनिवार को बाघ ने कुड़वा निवासी किसान 58 साल के प्रकाश पाने का शिकार भी कर लिया था। इसके बाद से ही ग्रामीण इस बाघ को पकडकऱ दूर छोड़े जाने की मांग कर रहे थे।
देर रात को पहुंची टीम
रविवार की देर रात करीब 11 बजे कान्हा नेशनल पार्क मंडला के डॉक्टर संदीप अग्रवाल और उनके साथी कुड़वा पहुंचे। उन्होंने रात को ही बाघ का रेस्क्यू करने की कोशिश की लेकिन अंधेरा ज्यादा होने की वजह से सफलता नहीं मिली। बाघ अंधेरे का फायदा उठाकर झाडिय़ों में छिप जा रहा था।
सोमवार 5 मई की सुबह रेस्क्यू टीम ने बाघ को घेरने की दोबारा कोशिश की। बाघ बार-बार अपनी जगह बदलकर अन्य जगह चला जाता था। कड़ी मशक्कत के बाद दो जेसीबी मशीन में मौजूद रेस्क्यू दल के सदस्यों ने तीन से चार बार टैंकुलाइज कर बाघ को बेहोश करने में सफलता प्राप्त कर ली।
वन अधिकारियों के अनुसार बाघ को विशेषज्ञों की निगरानी में पहले पेंच नेशनल पार्क ले जाया जाएगा। इसके बाद उसे भोपाल स्थित वन विहार भेज दिया जाएगा। बाघ के रेस्क्यू करने के बाद ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।
रेस्क्यू करते समय पूरी टीम का हौसला बढ़ाने क्षेत्रीय विधायक गौरव सिंह पारधी भी मौजूद रहे। एसडीओपी वारासिवनी अभिषेक चौधरी, एसडीओपी कटंगी विवेक शर्मा, वन विभाग से सीसीएफ पीएस सेंगर, डीएफओ अधर गुप्ता, एसडीओ बीआर सिरसम, रेंजर बाबूलाल चढ़ार के अलावा वन परिक्षेत्र कटंगी, वारासिवनी, खैरलांजी, लालबर्रा, रामपायली का पूरा अमला मौजूद रहा।
Published on:
05 May 2025 08:16 pm
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