
कांग्रेस ने सभी को चौंकाते हुए सम्राट सिंह सरसवार को अपना प्रत्याशी बनाया
Lok Sabha ticket to Balaghat District Panchayat President Samrat Singh Sarswar - एमपी में लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की ताजा लिस्ट में महाकोशल की बालाघाट सीट भी शामिल है। बालाघाट सीट से कांग्रेस ने सभी को चौंकाते हुए सम्राट सिंह सरसवार को अपना प्रत्याशी बनाया है। सम्राट सिंह सरसवार को प्रत्याशी घोषित किए जाने पर कई कांग्रेसी भी हैरान हैं। दरअसल दो साल पहले ही जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए उन्होंने कांग्रेस को दो फाड़ कर दिया था।
सम्राट सिंह Samrat Singh Sarswar वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। उनका परिवार कांग्रेसी ही रहा है लेकिन सम्राट पार्टी से बगावत कर चुके हैं। इसके बाद भी कांग्रेस ने उनपर भरोसा जताया है। दरअसल सम्राट सिंह बालाघाट जिले में जमीनी तौर पर लगातार सक्रिय रहे और राज्य की बीजेपी सरकार का जबर्दस्त विरोध करते रहे। इसका लाभ उन्हें लोकसभा चुनाव loksabha chunav 2024 प्रत्याशी के रूप में मिला।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सम्राट सिंह सरसवार के सामने भाजपा से भारती पारधी bharti pardhi चुनावी मैदान में हैं। राजनीतिक परिवार से आने वाले सम्राट के पिता अशोक सिंह सरसवार बालाघाट से दो बार विधायक रहे हैं। बालाघाट सीट पर पहले चरण में 19 अप्रेल को वोट पडऩे वाले हैं।
बहुमत के बाद भी कांग्रेस में दो फाड़
सम्राटसिंह को भले ही जिला पंचायत अध्यक्ष होने के नाते पार्टी ने तरजीह दी लेकिन ये पद उन्होंने बागी होकर हासिल किया था। वे कांग्रेस के आधिकारिक प्रत्याशी के खिलाफ लड़े जिससे पार्टी दो फाड़ हो गई। बालाघाट जिला पंचायत में बहुमत होने के बाद भी कांग्रेस का प्रत्याशी हार गया।
कांग्रेस समर्थित सदस्य सम्राट सरसवार ने पार्टी से बगावत की और जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए। सम्राट सरसवार को समर्थन देनेवाले निर्दलीय सदस्य योगेश उर्फ राजा लिल्हारे जिपं उपाध्यक्ष बन गए थे। 27 सदस्यों वाली जिला पंचायत बालाघाट में निर्वाचन के बाद सम्राट सरसवार को 11, केशर बिसेन और अनुपमा नेताम को 8-8 मत प्राप्त हुए। इस तरह तीन वोटों से सम्राट सरसवार जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे।
कांग्रेस ने रातों रात बदला प्रत्याशी
जिला पंचायत अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस पहले से ही दो गुटों में बंटी हुई थी। चुनाव के पहले दिनभर तक सम्राट सरसवार ही जिला पंचायत अध्यक्ष के दावेदार थे लेकिन रात में अचानक पार्टी पदाधिकारियों ने उनकी बजाए केशर को अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद सम्राट ने बगावत कर दी और पार्टी दो धड़ों में बंट गई।
इधर जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद सम्राट सरसवार दोबारा पार्टी में आ गए। उन्होंने कहा कि भले ही बागी होकर चुनाव लड़ा, लेकिन वे कांग्रेसी ही हैं। जिपं सदस्य के चुनाव से लेकर अध्यक्ष के निर्वाचन के पूर्व तक उन्हें ही प्रत्याशी बनाए जाने का आश्वासन दिया गया था और उन्होंने इसके लिए प्रयास भी किया।
Published on:
24 Mar 2024 06:56 pm
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