
महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए रखेंगी व्रत
इस वर्ष भी जिला मुख्यालय सहित अन्य तहसील व ग्रामीण अंचलों में गुरूवार को हरछठ पर्व और भगवान श्री कृष्ण के बड़े भ्राता भगवान बलराम की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। हरछठ पर्व और बलराम जयंती पर जिले भर में विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन होंगे, जो देर शाम तक जारी रहेंगे। हिंदू धर्म में हरछठ, छठ का खासा महत्व है। यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि पर मनाई जाती है। इसे हलषष्ट, हलछठ, ललही छठ के नाम से जाना जाता है। इस दिन बलराम जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता है कि इस तिथि के समय भगवान कन्हैया के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इस कारण इस दिन भगवान बलराम की पूजा का विधान है। हरछठ व्रत करने से संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली आती है।
पंचांग की मानें तो भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि 14 अगस्त को सुबह 04.23 बजे आरंभ होगी, जो 15 अगस्त की रात 02.08 बजे समाप्त हो जाएगी। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल हरछठ 14 अगस्त को मनाया जा रहा है। हरछठ व्रत भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी के पहले रखा जाता है।
शहर नर्मदा नगर ग्रहयोग भवन के ज्योतिषाचार्य पंडित अरविंद चंद तिवारी के अनुसार हरछठ का पर्व महिलाओं के लिए बेहद खास है। इस दिन वे संतान के खुशहाली की कामना करती है। साथ ही यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख समृद्धि और सुरक्षा के लिए रखा जाता है। यह पर्व श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम को समर्पित है, उन्हें हलधर भी कहा जाता है, उनका मुख्य हथियार हल है।
:- प्रो. तिवारी के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त. प्रात: 04.23 बजे से 05.07 बजे तक
:- अमृत काल का मुहूर्त. सुबह 06.50 बजे से 08.20 बजे तक
:- अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.59 बजे से दोपहर 12.52 बजे तक
:- विजय मुहूर्त दोपहर 02.37 बजे से 03.30 बजे तक
:- गोधूलि मुहूर्त शाम 07.01 से 07.23 बजे तक है।
प्रो. तिवारी के अनुसार हरछठ के दिन व्रती महिलाओं को हल से जुती हुई धरती पर नहीं चलना चाहिए और न हीं हल से तैयार की गई अन्न को खाना चाहिए। इस दिन साग-सब्जी के अलावा गाय के दूध और दही का भी सेवन करने पर मनाही है।
पर्व को लेकर बुधवार को बाजार गुलजार नजर आए। बड़ी संख्या में महिलाएं पूजन सामग्री खरीदारी करते नजर आई। पूजन उपरांत उन्हें बांस से बनी टोकरी में लाई, महुआ, चने और पूजन में चढ़े फलों का प्रसाद वितरित किया जाता है। बाजार में पूजन सामग्री के अलावा पूजन में चढऩे वाले फल और बांस से बनी छोटी टोकनियों की खूब खरीदारी की गई।
Published on:
13 Aug 2025 09:07 pm
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