scriptProblem-किसान मांग रहे डीएपी खाद, सोसायटियों से मिल रहा एनपीके | Problem- Farmers are demanding DAP fertilizer, NPK is being provided by societies | Patrika News
बालाघाट

Problem-किसान मांग रहे डीएपी खाद, सोसायटियों से मिल रहा एनपीके

किसानों की डिमांड डीएपी खाद की लेकिन सोसायटियों से मिल रहा एनपीके। इन दिनों सोसायटियों में डीएपी का स्टॉक कम हो गया है। मांग के अनुरुप डीएपी खाद सोसायटियों में नहीं है। डीएपी खाद नहीं मिलने पर किसान परेशान हो रहे हैं। बालाघाट. किसानों की डिमांड डीएपी खाद की लेकिन सोसायटियों से मिल रहा एनपीके। […]

बालाघाटJun 27, 2024 / 09:46 pm

Bhaneshwar sakure

डीएपी खाद

खुरसोड़ी सोसायटी में भंडारित डीएपी।

किसानों की डिमांड डीएपी खाद की लेकिन सोसायटियों से मिल रहा एनपीके। इन दिनों सोसायटियों में डीएपी का स्टॉक कम हो गया है। मांग के अनुरुप डीएपी खाद सोसायटियों में नहीं है। डीएपी खाद नहीं मिलने पर किसान परेशान हो रहे हैं।
बालाघाट. किसानों की डिमांड डीएपी खाद की लेकिन सोसायटियों से मिल रहा एनपीके। इन दिनों सोसायटियों में डीएपी का स्टॉक कम हो गया है। मांग के अनुरुप डीएपी खाद सोसायटियों में नहीं है। डीएपी खाद नहीं मिलने पर किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों की मांग पर 6 हजार एमटी डीएपी और 10 हजार एमटी यूरिया खाद की डिमांड शासन को भेजी गई है।
सोसायटियों में कम हुआ स्टॉक
जानकारी के अनुसार जिले की सभी सोसायटियों में डीएपी का स्टॉक कम हो गया है। हालांकि, कुछेक सोसायटियों में तो स्टॉक ही नहीं है। जिसके चलते किसानों को डीएपी खाद प्रदान नहीं किया जा रहा है। हालांकि, सोसायटियों में डीएपी को छोडकऱ अन्य खाद का पर्याप्त स्टॉक है। लेकिन डीएपी के सब्सिट्यूट एनपीके को किसान लेना पसंद नहीं कर रहे हैं। जिसके कारण समस्या उत्पन्न हो रही है।
डीएपी, एनपीके सहित अन्य खाद की स्थिति
जिले की अलग-अलग सोसायटियों में मौजूदा समय में करीब 1000 एमटी डीएपी खाद का भंडारण है। खरीफ फसल सीजन शुरु होने पर प्रशासन ने 6 हजार एमटी डीएपी खाद का भंडारण किया था। जिसमें से करीब 5 हजार एमटी खाद का उठाव हो चुका है। इसी तरह एनपीके खाद करीब 8 हजार एमटी, यूरिया करीब 6 हजार एमटी, सिंगल सुपर फास्फेट करीब 5 हजार एमटी भंडारित है। इसके अलावा देवपुत्र, जिंक, पोटाश, ईफको सहित अन्य खाद भी भंडारण है।
महंगे दाम में बेच रहे व्यापारी
सोसायटियों में डीएपी खादी की कमी होने का पूरा फायदा व्यापारी उठा रहे हैं। डीएपी खाद को निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर बेच रहे हैं। बावजूद इसके किसान महंगे दाम पर भी डीएपी की खरीददारी कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार सोसायटियों में डीएपी खाद 1350 रुपए प्रति बोरी की दर से मिल रहा है। जबकि यही खाद 16 से 18 सौ रुपए प्रति बोरी की दर से व्यापारी बेच रहे हैं।
दो रेक की भेजी डिमांड
कृषि उपसंचालक राजेश खोबरागड़े ने बताया कि जिले में डीएपी की बढ़ती मांग को देखते हुए दो रेक यानी करीब 6 हजार एमटी खाद की डिमांड भेजी गई है। इसी तरह 10 हजार एमटी यूरिया खाद की भी डिमांड भेजी गई है। हालांकि, मौजूदा समय में यूरिया खाद की कोई कमी नहीं है। लेकिन आगामी समय में यूरिया की डिमांड बढऩे की संभावना के चलते अभी से उसका भंडारण किया जा रहा है। ताकि समय पर किसानों को खाद उपलब्ध हो सकें।
डीएपी और एनपीके में अंतर
उपसंचालक कृषि राजेश खोबरागड़े के अनुसार डीएपी एक रासायनिक और अमोनिया आधारित खाद है। डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन, 46 प्रतिशत फास्फोरस और 15.5 अमोनियम अमोनियम नाइट्रेट होता है। वीहं एनपीके में 12 प्रतिशत नाइट्रोजन, 32 प्रतिशत कार्बोक्सिलिक अम्ल और 16 प्रतिशत पोटेशियम होता है। जिसके चलते किसान डीएपी के स्थान पर एनपीके का उपयोग कर सकते हैं। डीएपी उर्वरक में पोटेशियम नहीं होता है। जबकि एनपीके उर्वरक में पोटेशियम भी होता है।
इनका कहना है
एनपीके और डीएपी में ज्यादा अच्छी खाद डीएपी ही है। डीएपी का उपयोग हम लोग काफी सालों से करते आ रहें है। उसका परिणाम भी अच्छा मिल रहा है। इसलिए हमें डीएपी खाद ही चाहिए। अन्य किसान भी इसी कारण डीएपी की मांग कर रहे हैं।
-सावथ पांचे, किसान
किसानों की मांग के अनुरुप डीएपी खाद का भंडारण करना चाहिए। ताकि समय पर किसानों को खाद मिल सकें। सोसायटियों में डीएपी की कमी का फायदा व्यापारी वर्ग उठा रहे हैं। किसानों को महंगे दामों में डीएपी की बिक्री कर रहे हैं।
-ज्ञानचंद चौधरी, किसान
सोसयाटियों में डीएपी खाद की कमी बनी हुई है। किसान डीएपी खाद की ज्यादा मांग कर रहे हैं। सोसायटियों में डीएपी नहीं मिलने पर बाजार से महंगे दामों में खरीदना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन किसानों को डीएपी खाद उपलब्ध करवाए।
-रमेश रनगिरे, किसान
जिले के किसान डीएपी खाद की मांग कर रहे हैं। अभी करीब 1 हजार एमटी डीएपी खाद भंडारित है। लगभग 6 हजार एमटी डीएपी की डिमांड भेजी गई है। किसानों को डीएपी के स्थान पर एनपीके लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
-राजेश खोबरागड़े, उपसंचालक कृषि

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