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बालाघाट। इस्लामिक साल के पहले माह मोहर्रम की 10 तारीख को पूरी दुनिया में यौमे अशुरा के रूप में मनाया जाता है। जिसमें विशेषकर हजरत इमाम हुसैन, उनका परिवार और उनके साथियों, जिन्होंने कर्बला के मैदान में धर्म और इंसानियत को बचाने के लिए अपनी कुर्बानी पेश की थी। जिनकी याद में यौमे अशुरा के दिन खिचड़ा और शर्बत बांटा जाता है और यतिमो एवं बेहसहारों की मदद की जाती है। ज्ञात हो कि माहे मोहर्रम की पहली तारीख से शहीदाने कर्बला की याद में मस्जिदों में मिलादो की महफिल, नातखानी, लंगर आदि का आयोजन हजरत ईमाम हुसैन के चाहने वालों द्वारा किया जाता है।
बालाघाट में यौमे आशुरा का पर्व 21 सितंबर को मनाया जाएगा। जिसमें सभी मस्जिदों और घरो में यौमे आशुरा की विशेष नमाज अदा की जाएगी और दुआएं मांगी जाएगी। जिसमें जामा मस्जिद बालाघाट में सुबह 9 बजे यौमे आशुरा की नमाज अदा की जाएगी और लोग अपने मरहुमीन और बुजुर्गो को याद करने कब्रिस्तान पहुंचेंगे।
ईमान तंजीम के प्रदेश संगठन मंत्री हाजी शोएब खान ने बताया कि यजीद नामक कु्रर बादशाह द्वारा हजरत ईमाम हुसैन से ये समझौता किया जा रहा था कि हजरत ईमाम हुसैन उसकी बातों को मान ले और उसे बादशाह कबूल कर ले लेकिन हजरत ईमाम हुसैन ने उसकी नीतियों का विरोध करते हुए उसकी बादशाहत कबूल नहीं की और धर्म एवं इंसानियत को बचाने कर्बला के मैदान में अपने साथ अपने परिवार की कुर्बानी दे दी। जिससे पूरे दुनिया को यह संदेश दिया कि हमेशा सच्चाई के साथ खड़े रहे और समाज में फैली कुरीतियों एवं बुराईयों को रोकने का काम करें। इसलिए मुस्लिमों का यह फर्ज बनता है कि यहीद और उसके हमख्याल लोगों की नीतियों का हर हाल में विरोध करें और समाज में फैली बुराईयों को खत्म करने का काम करें। यही कर्बला का पैगाम है।
लालबर्रा में कार्यक्रम
इस वर्ष भी लालबर्रा स्थित बस स्टैंड चौक पर शोहदाए कर्बला की याद में दोपहर 2 बजे से लंगर और शरबत ईमान तंजीम और जमात रजा ए मुस्तफा कमेटी लालबर्रा के जानिब से तकसीम किया जाएगा। साथ ही नातखानी और हजरत ईमाम हुसैन की जीवनी पर आलिमो और जानकारों द्वारा विचार रखे जाएंगे। इस कार्यक्रम में सभी धर्म एवं जाति के लोग शामिल होंगे।
Published on:
20 Sept 2018 09:08 pm
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