
शहीद सूरज सिंह को नम आंखों से विदाई
बलिया. अरूणाचल प्रदेश की सीमा पर वायुसेना के विमान ए एन 32 हादसे में शहीद जवान सूरज सिंह को शुक्रवार को अंतिम विदाई दी गई। वायु सेना के जवान तिरंगे से लिपटे सूरज के शव को लेकर जैसे ही बैरिया के चिरैयामोड़ पर पहुंचे तो जनसैलाब उमड़ पड़ा। सूरज के पार्थिव शरीर के साथ काफिला शोभा छपरा गांव की ओर चलता गया। नम आंखों से हजारों लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। एएन-32 विमान हादसे के 19 दिनों बाद बलिया, हल्दी, बैरिया होते हुए शुक्रवार दोपहर सैनिक का पार्थिव उनके पैतृक निवास शोभा छपरा पहुंचा। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने एयर फोर्स के वाहन को रोक कर पुष्प अर्पित किया। सूरज सिंह का शव जैसे ही गाड़ी से नीचे उतारा गया, मां पूनम देवी छाती पीट कर रोने लगी, पत्नी शालू तो बार-बार बेहोश हो जा रही थी, वहीं दोनों भाईयों का भी रो रोकर बुरा हाल था।
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तीन जून को असम के जोरहाट सेंटर से वायुसेना का एएन 32 विमान 13 जवानों को लेकर अरुणाचल प्रदेश के मेचूका एयरफोर्स सेंटर के लिए उड़ान भरा था, इसी विमान में सूरज सिंह भी सवार थे. यह विमान अरुणाचल प्रदेश के लोपो गांव के पास पहाड़ी पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। नौ जून को विमान का मलबा मिला था और 10 जून को एयरफोर्स की तरफ से विमान में सवार सभी 13 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी गई थी। सूरज कुमार सिंह की पत्नी शालू ने अपने पति को सलामी देकर अंतिम विदाई दी । वायु सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया तो जवान एस के सिंह के छोटे भाई प्रिंस ने अपने भाई को मुखाग्नि दी।
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सूरज सिंह की शादी 19 फरवरी को सोनबरसा निवासी रणजीत सिंह की पुत्री शालू सिंह से हुई थी। सूरज विवाह के बाद पहली बार बीते 12 मई को आए थे और 25 मई को लौट गए थे। सूरज सिंह तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और वह अपने छोटे दोनों भाइयों को भी सेना में भेजना चाहते थे । पढ़ाई के दिनों से ही सूरज अपने दोस्तों के बीच बहादुरी के लिए जाने जाते थे। मिलनसार स्वभाव के सूरज पर इलाके के लोगों को बहुत नाज था। दिसंबर 2014 में देश सेवा का जज्बा लेकर भारतीय वायु सेना नें भर्ती हुए सूरज को हमेशा देश के लिए कुछ करने की जिद रहती थी। वह गांव के युवाओं को डिफेंस में जाने के लिये प्रेरित भी करते थे ।
BY- AMIT KUMAR
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Published on:
21 Jun 2019 08:13 pm
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