पंचायत चुनाव के लिए युवक ने तोड़ा ब्रह्मचारी रहने का प्रण, 45 साल की उम्र में बिना मुहूर्त रचाई शादी

Highlights:

-ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए 45 वर्षीय युवक ने रचाई शादी

-सीट महिला आरक्षित होने के बाद तोड़ा वर्षों पुराना प्रण

-पिछले वर्ष भी चुनाव लड़ चुका है युवक

By: Rahul Chauhan

Published: 01 Apr 2021, 10:54 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

बलिया। यूपी पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के बाद राजनीतिक पार्टियां जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई हैं। वहीं भावी उम्मीदवार भी मैदान में उतरने को बेताब नजर आ रहे हैं। इस सबके बीच बलिया जिले का एक ऐसा मामला सामने आया है जहां प्रधान बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले युवक ने वर्षों के अपने ब्रह्मचारी रहने के प्रण को तोड़ बिना मुहूर्त शादी रचा ली। जिसके बाद वह सुर्खियों में आ गए। दरअसल, मामला बलिया जिले के विकासखंड मुरलीछपरा के ग्राम पंचायत शिवपुर कर्ण छपरा का है। जहां प्रधानी की सीट महिला के लिए आरक्षित होने पर 45 वर्षीय प्रत्याशी हाथी सिंह ने वर्षों पुराना प्रण तोड़ तत्काल शादी रचा ली। जिसके बाद वह अपनी पत्नी को मैदान में उतराने की तैयारी कर रहा है।

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जानकारी के अनुसार हाथी सिंह ने 2015 में भी प्रधानी चुनाव लड़ा था। उस दौरान उन्हें केवल 57 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद वह फिर से तैयारी में जुट गए और इस वर्ष दोबारा चुनाव लड़कर जीतने की उम्मीद लगाए बैठे थे। हालांकि उनके गांव की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित घोषित हो गई। जिसके चलते उनके निर्वाचित होने की उम्मीद भी टूट गई। लेकिन, इसका तोड़ निकालने के लिए उनके समर्थकों ने सुझाव उन्हें शादी कर अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाने का सुझाव दिया। 13 अप्रैल को नामांकन से पहले हाथी सिंह ने इस सुझाव पर अमल करते हुए शादी करने की ठानी और बिना मुहूर्त बिहार की अदालत में जाकर कोर्ट मैरिज कर ली। इसके बाद अपने गांव आकर मंदिर में 26 मार्च को शादी कर ली।

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उन्होंने बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से प्रधानी का चुनाव जीतने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मैंने जीवन में कभी शादी नहीं करने का फैसला किया था, लेकिन मेरे समर्थकों के कारण मुझे अपना फैसला बदलना पड़ा। मेरी मां की उम्र 80 वर्ष है, जिसके चलते वह चुनाव नहीं लड़ सकती थीं, इसलिए शादी करने का फैसला लिया। जिससे मैंने शादी की है वह अभी स्नातक स्तर की पढ़ाई कर रही है और ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने को तैयार है। आगे का निर्णय तो गांव के लोगों के हाथ में है।

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