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सात साल में घट गए 74,520 गौवंश, तस्करी भी बढ़ी, पशुपालकों ने मोड़ा मुंह

राज्य सरकार गौवंश के संरक्षण को लेकर नीतियां बना रही है। गौशालाएं खोली जा रही हैं। गांव-गांव में गौठान निर्माण कर गोबर व पैरा खरीदा जा रहा है। गौपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। शासन की इस योजना का लाभ मिल रहा है, लेकिन जिले में पशुपालक गौवंश एवं पशुपालन से मुंह मोड़ रहे हैं। इस कारण लगातार गौवंश घट रहा है। इसकी पुष्टि पशु चिकित्सा विभाग के आंकड़े कर रहे हैं।

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संरक्षण में सफलता नहीं: पशु पालन विभाग की गणना में हुई पुष्टि, 2012 में थे 4 लाख से अधिक, 2019 में रह गए 3.36 लाख

वाहन में भरा मवेशी,वाहन में भरा मवेशी,वाहन में भरा मवेशी

सतीश रजक/बालोद. राज्य सरकार गौवंश के संरक्षण को लेकर नीतियां बना रही है। गौशालाएं खोली जा रही हैं। गांव-गांव में गौठान निर्माण कर गोबर व पैरा खरीदा जा रहा है। गौपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। शासन की इस योजना का लाभ मिल रहा है, लेकिन जिले में पशुपालक गौवंश एवं पशुपालन से मुंह मोड़ रहे हैं। इस कारण लगातार गौवंश घट रहा है। इसकी पुष्टि पशु चिकित्सा विभाग के आंकड़े कर रहे हैं। 2012 में 18वीं पशु समगणना पशुपालन विभाग ने कराई। आंकड़ों को देखेंगे तो पता चलता है कि 4 लाख 10 हजार 997 गौवंश बालोद जिले में था। 2019 की पशु गणना में गौवंश घटकर 3 लाख 36 हजार 477 रह गए हैं। लगभग 74 हजार 520 गौवंश कम हो गए। अब अगली पशु गणना 2024 में होगी। जिस गौवंश को हम गौ माता का दर्जा देते हैं, उसकी तस्करी हो रही है।

युवा गौपालन से मोड़ रहे मुंह
अब विभाग से नई जानकारी भी मिल रही है कि इतनी योजनाओं के बाद भी कुछ वर्षों में पशु पालक अपने घरों के गौवंश को बेच रहे है। खासकर युवा वर्ग गौ पालन में आगे नहीं आ रहे है।

इस साल 10 से अधिक गौ तस्करी के मामले
जिले में गौ तस्करी के मामले बढ़े हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में करकाभाट के जंगल में गौवंश रस्सियों से बंधे मिले। गौ तस्करी रोकने जिले में गौरक्षा दल, विश्व हिन्दू परिषद व बजरंग दल के सदस्य सक्रिय हैं। एक साल के आंकड़े देखें तो जिले में गौ तस्करी के 10 से अधिक मामले सामने आए हैं। लगभग 30 पशु तस्कर पर कार्रवाई की है। तस्कारों से लगभग 300 गौवंश को सुरक्षित बचाया गया है। यह सिर्फ शासकीय आंकड़े हैं। कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिसमें गौ तस्कर तस्करी करने में सफल हुए हैं।

आंकड़ों से समझे कैसे कम हो रहा गौवंश
वर्ष - गौवंश - भैंसवंशी - बकरी
2011-12 - 4,10,997 - 47,957 - 48,798
2015-16 - 3,59,683 - 43,045 - 53,952
2019-20 - 3,36,77 - 30,225 - 54,321

बकरी, भेड़ व मुर्गी पालन में बढ़ी रुचि
गौ व भैंस पालन में किसानों ने अपना रुझान कम कर दिया है। तीन साल में तेजी से गौवंश पालन में कमी देखी गई है। 2012 में बकरी की संख्या 48,798 थी। 2019 में संख्या बढ़कर 54,341 हो गई। मुर्गी पालन 2012 में 4 लाख 73 हजार 755 था। 2019 में यह संख्या बढ़कर 11 लाख 29 हजार 434 हो गई।

गौ पालन का लाभ लेने में पीछे
पशुगणना के अनुसार गाय की औसत उम्र 15 से 20 साल होती है। हालांकि तमाम रोग भी लगते हैं। इनमें लम्पी, खुरपका, मुंहपका, गलाघोंटू, ब्रूसल्लोसिस, लगडिय़ा बुखार आदि हैं। हालांकि गौवंश को रोग मुक्त रखने पर्याप्त इंतजाम पशुपालन विभाग करता है। साथ ही कृत्रिम गर्भाधान समेत वंश बढ़ाने सरकार योजनाएं चला रही है।

पशुपालकों को प्रोत्साहन राशि दें
विश्व हिंदू परिषद अध्यक्ष बलराम गुप्ता ने कहा कि सरकार ने गौ सेवा व पशुपालन के लिए अच्छी योजना बनाई है। अभी भी गौठानों में समुचित व्यवस्था नहीं हैं। पशुपालक गौवंश न बेचें। तस्करी रोकने गांव-गांव में पशुपालकों को जागरूक कर रहे हैं। सरकार व शासन-प्रशासन पशुपालकों को प्रोत्साहन राशि दें, जिससे किसान पशुपालन में आगे आएं।

घटता गौवंश हमारे व देश के लिए चिंता का कारण
गौ रक्षा दल बालोद के सदस्य नरेंद्र जोशी ने कहा कि गौ रक्षा के लिए गौरक्षा दल सहित हिन्दू परिषद, बजरंग दल की टीम सक्रिय हैं। गौ रक्षा दल में अजय यादव की टीम लगातार गौ सेवा कर रही हैं। घटता गौवंश हमारे व देश के लिए चिंता का कारण है।

किसानों को प्रोत्साहित और जागरूक कर रहे
पशु चिकित्सा विभाग बालोद के उप संचालक डीके सिहारे ने कहा कि पशुपालकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हैं। फिर भी गौवंश में कमी चिंता का कारण है। लगातार किसानों को प्रोत्साहित और जागरूक कर रहे हैं। गौपालन के लाभ भी बता रहे हैं।