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81 हजार स्कूली बच्चों की थालियों से गायब हो गए आचार-पापड़ और फल, अब भात-दाल के ही भरोसे

मध्याह्न भोजन विद्यार्थियों की भूख मिटाओ योजना बनकर रह गई है। यहां बच्चों की थालियों से पोषण ही गायब हो गया है। किसी भी स्कूल में मेन्यू का पालन नहीं हो रहा है।

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बच्चों को स्कूल में पढऩे प्रेरित करने व पोषक स्तर बढ़ाने शुरू की गई थी योजना

81 हजार स्कूली बच्चों की थालियों से गायब हो गए आचार-पापड़ और फल, अब भात-दाल के ही भरोसे

बालोद. जिले में अब मध्याह्न भोजन विद्यार्थियों की भूख मिटाओ योजना बनकर रह गई है। यहां बच्चों की थालियों से पोषण ही गायब हो गया है। किसी भी स्कूल में मेन्यू का पालन नहीं हो रहा है। आखिरी बार कुकिंग कास्ट की राशि बीते साल अक्टूबर माह में बढ़ाई गई थी, वो भी लगभग 20 पैसे। पर शासन द्वारा जारी मेन्यू के हिसाब से बच्चों को भोजन नहीं परोस पा रहे हैं।

सरकार कुकिंग कास्ट की राशि बढ़ा दे
बता दें कि जिले के 81 हजार स्कूली बच्चों की थालियों से आचार-पापड़ व फल गायब ही हो गए हैं। बच्चे हर दिन स्कूल आएं व बच्चों के शरीर में पोषण स्तर भी सामान्य रहे इसलिए शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन की शुरुआत की गई थी। वहीं मध्याह्न भोजन संचालन करने वाले समूह की मानें तो अगर सरकार कुकिंग कास्ट की राशि बढ़ा दे व हर माह कुकिंग कास्ट की राशि देना शुरु करे तो मेन्यू के हिसाब से भोजन देने में कोई परेशानी नहीं होगी।

कहीं बन रही सिर्फ सब्जी व चावल, फल, खीर, पापड़, दाल भी गायब
मिली जानकारी के मुताबिक जिले के सरकारी 817 प्राथमिक व 409 माध्यमिक स्कूलों में मध्याह्न भोजन का संचालन किया जा रहा है। पर जिले के एक भी स्कूलों में शासन से जारी मेन्यू का पालन नहीं हो रहा। इसका प्रमुख कारण कुकिंग कास्ट की राशि का न बढऩा व समय पर राशि नहीं मिलना है। स्कूलों में बच्चों को खीर, पापड़, आचार भी देना है पर यहां सिर्फ सब्जी, चावल व कुछ स्कूलों में दाल ही खिलाई जा रही है।

राशि नहीं बढ़ी तो छोड़ दिया समूह, अब प्रधान पाठक चला रहे हैं मध्याह्न भोजन
मिली जानकारी के मुताबिक जिले में कुल 1226 स्कूलों में मध्याह्न भोजन का संचालन होता है। पर यहां कई महिला समूह हैं, जो इसका संचालन करती हैं। कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्होंने कुकिंग कास्ट की राशि नहीं बढ़ाने व समय पर राशि नहीं मिलने के कारण परेशान होकर मध्याह्न भोजन का संचालन ही छोड़ दिया। ऐसे में मध्याह्न भोजन का संचालन प्रधान पाठक या फिर प्रभारी प्रधान पाठक कर रहे हैं।

प्रतिदिन यह मेन्यू तय
[सोमवार] चावल/सांभर दाल (कुम्हड़ा, लौकी, मुनगा या अन्य हरी सब्जी मिलाकर सांभर), पापड़
[मंगलवार] चावल/दाल (मूंग, अरहर, चना, उड़द, मसूर आदि दाल), हरी सब्जी
[बुधवार] चावल/फ्राई दाल/सब्जी (आलू-चना या आलू-मटर या आलू-झुर्गा), आचार
[गुरुवार] चावल/दाल (मूंग, अरहर, चना, उड़द, मसूर आदि दाल) हरी सब्जी
[शुक्रवार] चावल/फ्राई दाल, सब्जी (आलू, सोयाबीन, बड़ी) आचार अथवा वेज पुलाव, टमाटर की फ्राई चटनी और पापड़।
[शनिवार] दूध के साथ खीर व अंकुरित चना (15 ग्राम)
इस पर लगातार मांग संचालन समूह कर रही है पर यह शासन स्तर की बात है शासन चाहे तो मेनू का पालन करवा सकता है। पर अभी तक इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यह मिलती है कुकिंग कास्ट की राशि
प्राथमिक शाला - 5.69 रुपए प्रति विद्यार्थी
माध्यमिक स्कूल - 8.17 रुपए प्रति विद्यार्थी

जानें मध्यान्ह भोजन कितने बच्चे करते हैं
प्राथमिक स्कूल के 48759 विद्यार्थी
माध्यमिक स्कूल के 32,295 विद्यार्थी
कुल 81,054 स्कूली बच्चे

जल्द राशि जारी कर दी जाएगी

बालोद डीईओ मुकुल केपी साव ने कहा शासन से जारी निर्देश के अनुसार ही मध्याह्न भोजन का संचालन किया जा रहा है। कुकिंग कास्ट की राशि का आवंटन कर दिया गया है। बचे हुए माह की भी राशि जल्द कर दी जाएगी।

जितनी राशि मिलती है, उसमें नहीं बन सकता

बालोद के मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ व संचालन संघ अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने कहा कुकिंग कास्ट की राशि बढ़ा दें व हर माह समय पर राशि दें तो मेन्यू के अनुसार मध्याह्न भोजन दे सकते हैं, लेकिन जो मेन्यू तय है वह इतनी कम राशि में नहीं बन सकता।