मामले में परियोजना अधिकारी सीएल भुआर्य को भी प्रमुख जिम्मेदार माना गया है। उनके द्वारा समूह के कार्यों की कोई निगरानी नहीं की जाती थी। जांच में ये बात सामने आई है कि साल्हे के समूह द्वारा बनाए जाने वाले रेडी टू ईट फूड पैकेट में मात्रा भी कम पाई गई थी। यूनिट शुरू नहीं हुआ था, मिक्सिंग कार्य नियम विपरीत साल्हे के बजाय अन्य जगह पर हो रहा था। गैर सबला किशोरी बालिकाओं का रेडी टू ईट फूड उत्पादन संबंधी कोई रिकार्ड व पंजी संधारित नहीं कराई जाती थी, जिससे योजना में गोलमाल किया जा सके। उक्त सभी लापरवाही से परियोजना अधिकारी के खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम तीन का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की गई है।