31 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गुड़िया बनी गवाह, अदालत ने माना सच! मूक-बधिर पीड़िता को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने आरोपी को सुनाई उम्रकैद

CG High Court: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से सामने आए एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

2 min read
Google source verification
गुड़िया बनी गवाह, अदालत ने माना सच! मूक-बधिर पीड़िता को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने आरोपी को सुनाई उम्रकैद(photo-AI)

गुड़िया बनी गवाह, अदालत ने माना सच! मूक-बधिर पीड़िता को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने आरोपी को सुनाई उम्रकैद(photo-AI)

CG High Court: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से सामने आए एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट ने मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न सिर्फ पीड़िता को न्याय दिलाया, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में विशेष परिस्थितियों में दिए गए साक्ष्यों की अहमियत को भी स्पष्ट किया है।

CG High Court: प्लास्टिक की गुड़िया बनी गवाही का माध्यम

इस मामले की सबसे अहम और भावुक कड़ी यह रही कि पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी। ऐसे में उसने कोर्ट में प्लास्टिक की गुड़िया के माध्यम से अपने साथ हुए दुष्कर्म की आपबीती बताई। इशारों और प्रतीकों के जरिए दी गई इस गवाही को कोर्ट ने गंभीरता से सुना और उसे मान्य साक्ष्य माना। यह न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आया है।

रिश्तेदार ने ही किया था दुष्कर्म

जानकारी के मुताबिक, 29 जुलाई 2020 को जब पीड़िता घर में अकेली थी, तब आरोपी रिश्तेदार नीलम कुमार ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता ने इशारों के माध्यम से अपनी मां को पूरी बात बताई और आरोपी की पहचान भी स्पष्ट की। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मूक-बधिर पीड़िता द्वारा संकेतों के माध्यम से दी गई जानकारी भी कानूनी रूप से मौखिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य है।

संकेतों में दी गई गवाही को कोर्ट ने माना वैध

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी उसके समर्थन में हों। पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 450 (घर में घुसकर अपराध करना) और 376(2) (दुष्कर्म) के तहत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था। ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और पीड़िता की गवाही के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी पाया।

संवेदनशील मामलों में न्याय की मिसाल

यह फैसला उन मामलों के लिए मिसाल बनकर सामने आया है, जहां पीड़ित विशेष परिस्थितियों में होते हैं और पारंपरिक तरीके से गवाही देना संभव नहीं होता। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि न्याय केवल शब्दों पर नहीं, बल्कि परिस्थितियों और सच्चाई पर आधारित होता है।

इस फैसले के जरिए न्यायालय ने यह भी संदेश दिया है कि महिलाओं और विशेष रूप से दिव्यांग पीड़ितों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। कानून ऐसे मामलों में पूरी संवेदनशीलता और सख्ती के साथ कार्रवाई करता है।