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दिव्यांगों के लिए खुशखबरी : पुनर्वास केंद्र में ही नि:शुल्क बनवा सकेंगे नकली अंग, चलने-फिरने में होगी सुविधा

बालोद जिले के दिव्यांगों के लिए बड़ी खुश खबर सामने आई है। नकली अंग के लिए अब बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिला मुख्यालय के सिवनी में संचालित समाज कल्याण विभाग कार्यालय के पास ही शासन ने दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का निर्माण किया है। इसे दिव्यांगों के लिए खोल दिया गया है। केंद्र का उद्घाटन जून में मंत्री अनिला भेंडिया ने किया था। अब नकली अंग बनाने का कार्य दिसंबर से शुरू किया गया है।

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अब तक पांच लोगों को अंग बनाकर वितरित किया जा चुका, दिव्यांगों का चयन कर लेते हैं नाप

दिव्यांगों के आवेदन के बाद उनके पैर व हाथ का नाप लेते

बालोद. जिले के दिव्यांगों के लिए बड़ी खुश खबर सामने आई है। नकली अंग के लिए अब बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिला मुख्यालय के सिवनी में संचालित समाज कल्याण विभाग कार्यालय के पास ही शासन ने दिव्यांग पुनर्वास केंद्र का निर्माण किया है। इसे दिव्यांगों के लिए खोल दिया गया है। केंद्र का उद्घाटन जून में मंत्री अनिला भेंडिया ने किया था। अब नकली अंग बनाने का कार्य दिसंबर से शुरू किया गया है। इस दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में जरूरतमंद दिव्यांगों के लिए नकली अंग बनाया जाएगा, जिससे दिव्यांग आसानी से चल फिर सकेंगे। यह अंग नि:शुल्क दिया जाएगा। वर्तमान में नकली अंग के लिए दिव्यांगों को दुर्ग, भिलाई, रायपुर तक का सफर करना पड़ता था। अच्छी बात यह है कि केंद्र में पांच दिव्यांग के नकली पैर व हाथ का निर्माण कर वितरित भी कर चुके हैं।

30 और पैर व हाथ बनाने का आया ऑर्डर
समाज कल्याण विभाग के मुताबिक वर्तमान में पांच दिव्यांग को नकली हाथ व पैर का वितरण किया गया। यह नकली अंग दिव्यांग पुनर्वास केंद्र केंद्र में बनाया गया हैं। अभी लगभग 30 दिव्यांगों का और ऑर्डर आया है, जिसे बनाने का काम जारी हैं।

चयन के बाद नाप कर बनाते हैं नकली अंग
समाज कल्याण विभाग के उप संचालक अजय गेड़ाम ने पत्रिका को बताया कि पहले दिव्यांगों का चयन किया जाता है। दिव्यांगों के आवेदन के बाद उनके पैर व हाथ का नाप लेते हैं। इसके बाद उनके नकली अंग का निर्माण किया जाता है। वर्तमान में इस केंद्र में 11 कर्मचारी हैं, जो दिव्यांगों के नकली अंग बनाने का काम करते हैं।

मनोरोगी भी केंद्र में बना सकते हैं मेडिकल प्रमाण पत्र
जिले में कई मनोरोग दिव्यांग भी हैं। इन दिव्यांगों को पहले राजनांदगांव इसके जांच के लिए लिए जाना पड़ता था। अब दिव्यांग पुनर्वास केंद्र केंद्र में इनकी जांच हो जाएगी और मेडिकल प्रमाण पत्र बना सकेंगे।

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