
डौंडी ब्लॉक के ग्राम पुत्तरवाही के आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण किडनी व लीवर की बीमारी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर यह समस्या क्यों हो रही है। ग्रामीणों को अंदेशा है कि जलस्रोत में खराबी होगी, जिसका पानी पीने से यह समस्या हो रही है। बीते सप्ताह गांव के दो व्यक्यिों की मौत हो गई थी। इससे ग्रामीण घबरा गए हैं। जल स्रोतों की जांच कराने की जानकारी पीएचई व जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम को दी। कुछ दिन पहले ही पीएचई की जल परीक्षण टीम ने आठ जल स्रोतों की जांच की और पानी को लैब भेजा। जांच में एक जलस्रोत में नाइट्रेड व दूसरे में आयरन की मात्रा पाई गई।
पीएचई अधिकारी का कहना है कि नाइट्रेड व आयरन बहुत ही कम मात्रा में पाया गया है। इससे मनुष्य पर उतना ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। यह नहीं कह सकते है कि बीमार पडऩे की वजह सिर्फ पानी है। अन्य कारण जैसे खानपान भी हो सकता है। हालांकि विभाग ने नाइट्रेड वाले जलस्रोत का उपयाग नहीं करने का निर्देश दिया है।
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मामले में ग्रामीण रोहित कुमार तारम ने बताया कि वह भी लीवर किडनी की बीमारी से ग्रसित है। डॉक्टर के पास भिलाई गया तो डॉक्टर ने दूषित पानी के कारण यह समस्या आना बताया। मेरा उपचार अभी भी चल रहा है। गांव में और भी लोग हैं, जो इस समस्या से ग्रसित है। मुख्य वजह पता नहीं चल रही है।
ग्रामीण चुरामन सेन ने बताया कि गांव में आधा दर्जन से अधिक लोग इस तरह की समस्या से ग्रसित है। चार साल में लगभग 14 लोगों ने दम तोड़ दिया है। सबका अलग-अलग कारण है। गांव की इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने शासन-प्रशासन को आगे आकर काम करना चाहिए।
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ग्रामीण कचरू राम भुआर्य व शिव प्रसाद तारम ने बताया कि गांव में कई ग्रामीण ज्यादा बीमार रहते है। बीमारी का कारण जलस्रोत का पानी हो सकता है। इसकी पुष्टि नहीं कर सकते हैं। लेकिन हमारे गांव में समस्या है। राहत दिलाने का प्रयास शासन-प्रशासन को करना चाहिए।
पीएचई बालोद के ईई सागर वर्मा ने कहा कि ग्राम पुत्तरवाही में ग्रामीणों के बीमार होने की जानकारी मिली थी। टीम भेजकर आठ जलस्रोतों का सैंपल लिया। एक में नाइट्रेड व दूसरे में आयरन मिला है। यह उतना घातक नहीं है। पानी की वजह से बीमार हो रहे हैं, यह नहीं कह सकते। बीमारी का अन्य कारण हो सकता है। ऐहतियात के तौर पर नाइट्रेड वाले जल स्रोत का उपयोग नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
बालोद जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम ने कहा कि ग्रामीणों से मिली जानकारी के बाद पीएचई को सूचना दी। गांव का निरीक्षण भी किया। ग्रामीणों से बात भी की। अभी समझ नहीं आ रहा है कि किस वजह से म यह गंभीर मामला है। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को इस मामले को संज्ञान में लेना चाहिए।
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Updated on:
17 Mar 2026, 11:19 PM IST
Published on:
17 Mar 2026, 11:19 PM IST
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