
अच्छी बारिश से तांदुला तीन साल में सबसे बेहतर स्थिति में, जलाशय में जलभराव 34 से बढ़कर 59 फीसदी पर पहुंचा
बालोद . अच्छी बारिश न होने जल संकट की आशंका से घिरे जिले के लोंगो को लिए राहत की खबर है। पिछले सप्ताहभर में हुई बारिश ने इस जल संकट का आंशका काफी हद तक टाल दिया है। बारिश के कारण 10 दिन में जिले की लाइफ लाइन तांदुला जलाशय में 2916 एमसीएफटी से ज्यादा जलभराव हुआ है। इससे पहले तांदुला में सिर्फ 34.50 फीसदी यानी 3682.53 एमसीएफटी पानी था। यह अब बढ़कर 59.01 यानी 6298.72 एमसीएफटी पहुंच गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यह पिछले तीन साल में 18 अगस्त की स्थिति में जलभराव के लिहाज से सबसे बेहतर स्थिति है। वहीं खरखरा में भी करीब 15 फीसदी जलभराव हुआ है।
दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिला निस्तारी व सिंचाई के लिए आश्रित
तांदुला और खरखरा जलाशय से दुर्ग,बालोद और बेमेतरा जिले की पानी की जरूरत पूरी होती है। खरखरा से दुर्ग-भिलाई की प्यास बुझती है, वहीं तांदुला के पानी से ग्रामीण क्षेत्र की निस्तारी होती है। बीएसपी समेत अन्य उद्योगों का भी यहीं से पानी मिलता है। मानसून सीजन में अब तक तेज बारिश नहीं होने के कारण जलाशयों में पर्याप्त जलभराव नहीं हो रहा था। इससे चिंता बढ़ गई थी। अब जलाशयों में पर्याप्त जल भराव हो रहा है। अफसरों के मुताबिक दोनों जलाशयों के कैचमेंट में पिछले 10 दिन से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते कैचमेंट से जलाशयों में लगातार पानी पहुंच रहा है।
बालोद-बस्तर में बारिश बना वरदान
जलाशयों के लिए इस बार बालोद व बस्तर इलाके में अच्छी बारिश वरदान साबित हुआ। दुर्ग जिले में खंडवर्षा के कारण नदी-नालों में बहाव नहीं बन रहा था। इस बीच बस्तर और बालोद में जमकर बारिश हुई। बालोद के डौंडीलोहारा से लेकर बस्तर में कांकेर तक का इलाका इन दोनों जलाशयों का कैचमेंट एरिया है।
जिले में अब तक 647 मिमी बारिश
बालोद जिले में चालू मानसून सत्र के दौरान एक जून से आज 18 अगस्त 2018 तक 647 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। बालोद तहसील में अब तक 866.1 मिलीमीटर, गुरुर तहसील में 689.7 मिलीमीटर, गुंडरदेही तहसील में 737.2 मिमी, डौंडी तहसील में 511.4 मिमी और डौंडीलोहारा तहसील में 430.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
2014 में इस अवधि में छलक गए थे जलाशय
वर्ष 2014 में अगस्त की शुरुआत में जमकर बारिश हुर्ई थी। इससे सभी जलाशय छलक गए थे। जलाशयों से पानी छोडऩा पड़ा था। इस कारण अगस्त में ही शिवनाथ उफान पर पहुंच गया था। वहीं वर्ष 2015 में भी जलाशयों में इस अवधि तक आधा से ज्यादा पानी भर गया था।
इसलिए कह रहे हैं पानी की चिंता दूर
निस्तारी व पेयजल के लिए कम से कम 30 फीसदी पानी की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा करीब 10 फीसदी वाष्पीकरण में खर्च हो जाता है। ऐसे में आपात स्थिति के लिए कम से कम 40 फीसदी पानी होना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि दोनों जलाशयों में इससे ज्यादा जलभराव हो चुका है, वहीं कैचमेंट से लगातार पानी पहुंच रहा है। इससे जल भराव और बढ़ेगा
जलाशयों में पानी का अच्छा भराव
ईई जल संसाधन संभाग बीजी तिवारी ने बताया जलाशयों में पानी का अच्छा भराव हो रहा हैं। ऊपरी क्षेत्र से लगातार अच्छी बारिश हो रही है। इस कारण नदी नालों से जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंच रहा है। एक दो दौर की अच्छी बारिश से पानी की चिंता खत्म हो जाएगी।
तीन साल में 18 अगस्त की स्थिति में भराव (आंकड़े प्रतिशत में)
वर्ष तांदुला खरखरा खपरी गोंदली
2016 41.06 68.78 99.49 30.25
2017 24.62 22.10 79.98 41.85
2018 59.01 46.40 79.98 54.95
दस दिन में इस तरह बढ़ा जलस्तर
तांदुला
कुल भराव क्षमता - 10674 मि. घनफुट
8 अगस्त को - 3682.53 मि. घनफुट
18 अगस्त को - 6298.72 मि. घनफुट
खरखरा
कुल भराव क्षमता - 5000 मि. घनफुट
8 अगस्त को - 1561.50 मि. घनफुट
18 अगस्त को -2320.00 मि. घनफुट
खपरी
कुल भराव क्षमता - 413 मि. घनफुट
8 अगस्त को - 49.56 मि. घनफुट
18 अगस्त को - 330.31 मि. घनफुट
गोंदली
कुल भराव क्षमता - 3410 मि. घनफुट
8 अगस्त को - 1534.50 मि. घनफुट
18 अगस्त को -1872.43 मिट्रिक घनफुट
Published on:
19 Aug 2018 09:00 am
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