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हरेली पर्व : कृषि औजारों की पूजा कर लगाया चीला-रोटी का भोग, भगवान से की अच्छी फसल की कामना

अंचल में गुरुवार को पहला पर्व हरेली धूमधाम से मनाया गया। किसानों ने अपने कृषि औजारों के साथ बैल व मवेशियों की नहलाकर विशेष पूजा की। उत्साह सुबह से नजर आ रहा था। किसानों ने कृषि औजारों को धोने के बाद चावल के आटे से बनी चीला रोटी का भोग लगाकर विशेष पूजा की। भगवान से अच्छी फसल की प्रार्थना की।

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हरेली पर्व धूमधाम से मनाया

कृषि औजारों की पूजा करते हुए किसान परिवार।

बालोद. अंचल में गुरुवार को पहला पर्व हरेली धूमधाम से मनाया गया। किसानों ने अपने कृषि औजारों के साथ बैल व मवेशियों की नहलाकर विशेष पूजा की। उत्साह सुबह से नजर आ रहा था। किसानों ने कृषि औजारों को धोने के बाद चावल के आटे से बनी चीला रोटी का भोग लगाकर विशेष पूजा की। भगवान से अच्छी फसल की प्रार्थना की। किसानों ने आधी रात को चरवाहों (राउत) की जड़ी-बूटियों से बनाई गई दवाई को अपने-अपने मवेशियों को खिलाने के साथ गेहूं के आटे से बनी लोंदी में नमक मिलाकर खिलाया। मान्यता है कि इसके सेवन से मवेशी बीमार नहीं पड़ते हैं।

घर के मुख्य द्वार व कृषि औजारों पर लगाई नीम की टहनी
चरवाहा ने हरेली पर सुबह-सुबह लोगों के घर जाकर नीम की टहनी को मुख्य द्वार व कृषि औजारों पर लगाया। घरों के आगे नीम की टहनी लगाने से घर का वातावरण स्वच्छ रहता है, जिससे घर के सदस्य बीमार नहीं पड़ते हैं।

घर-घर बनाए गए पकवान
हरेली पर घर-घर पकवान बनाया जाता है। घरों में पारंपरिक पूड़ी, गुलाब जामुन, पकौड़े, बड़ा आदि बनाए गए। कृषि औजारों की पूजा करने के बाद लोगो ने इन व्यंजनों का सेवन किया। एक-दूसरे के घर जाकर हरेली की बधाई देने के साथ पकवानों का स्वाद लिया।

बच्चों ने लिया गेड़ी का आनंद
हरेली पर कई गांवों में खेल का भी आयोजन हुआ। महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हरेली पर गेड़ी चलाने की परंपरा है, जिसका पालन करते हुए गांवों में बच्चे गेड़ी पर चढ़कर कीचड़ से भरी गलियों में दौड़ते नजर आए। ग्रामीण इलाकों में विविध खेलकूद का आयोजन हुआ। इस दिन लोग हरेली के उत्साह में दिखाई दिए।