
परिवार के साथ पटाखे फोड़ते बच्चे।
बालोद. रोशनी और खुशियों का पर्व दीपावली उत्साह के साथ मनाया गया। शुभ मुहूर्त में घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों में विघ्न विनाशक भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर की विधि-विधान से पूजा की गई। घरों पर सदस्यों ने दीये जलाए और मिष्ठान वितरित किया। दिवाली पर पूरा घर, गांव, शहर दीये से जगमगा उठा। दीपावली को लेकर लोग कई दिन से तैयारी कर रहे थे। सुबह घरों की साफ-सफाई के बाद लोगों ने बाजार का रुख किया। किसी ने पूजन का सामान खरीदा तो किसी ने लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति। साथ में लाई-मिठाई, फूल, दीये की भी खरीदारी की। घरों में महिलाओं ने सुबह पकोड़ी, मीठी रोटी, खिचड़ी आदि पकवान बनाए। शाम को बड़े-बुजुर्गों ने घरों और प्रतिष्ठानों में मुहूर्त के अनुसार पूजा की। घरों, प्रतिष्ठानों के अलावा मंदिरों में फूल की लडिय़ों और शाम को विद्युत झालरों से सजावट की गई। घरों में रंगोली बनाने के साथ दीप जलाए गए। साथ ही परिचितों से मिलकर व इंटरनेट मीडिया के माध्यम से एक दूजे को बधाई देते नजर आए।
बच्चों नें जलाए पटाखे
इस दिन छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों ने पटाखे जलाए। हालांकि दीपावली के एक दिन बाद सूर्यग्रहण की वजह से गोवर्धन पूजा बुधवार को की गई। वहीं बच्चों में उत्साह दिखाई दिया।
आधी रात रचाया गौरा गौरी का विवाह
कार्तिक अमावस्या को जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में मोहल्लेवासी बाजे- गाजे के साथ समूह में खेत या पवित्र स्थान से मिट्टी लेने गए। मिट्टी लाने के बाद बाद पूजा स्थल में (गौरा) भगवान शंकर व पार्वती (गौरी) के साथ नंदी, भीमसेन आदि की आकर्षक प्रतिमाएं बनाई गई। रात में दोनों प्रतिमाओं के साथ भगवान शंकर व पार्वती के विवाह की रस्में निभाई गई। इस दौरान शिव जी की बारात भी निकाली गई, जिसमें बाराती बने लोगों ने बाजे-गाजे के साथ खूब थिरके। बूढ़ा महादेव गौरा उत्सव समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र ठाकुर ने बताया कि इस बार सूर्य ग्रहण की वजह से कई गांवों में सोमवार की रात तो कई गांवों में मंगलवार की रात गौरा-गौरी का विवाह रचाया।
फूल कुचरने की परंपरा हुई
पूजा स्थल को गौरा चौरा कहा जाता है। इसी पूजा स्थल पर रात में फूल कुचरने की परंपरा हुई। दूसरे दिन बाजे-गाजे के साथ जाकर के खेत से मिट्टी लाए हैं। विवाह की रस्में निभाई गई। मंगलवार व बुधवार की सुबह गौरा-गौरी की शोभायात्रा निकाली, जिसमें बाराती बने मोहल्लेवासियों ने बाजे गाजे के साथ खूब थिरके और तालाब पहुंचे। पूजा-अर्चना की गई और तालाब में विसर्जन किया गया।
गाय को खिलाई खिचड़ी, कुम्हड़ा व कोचई का लगाया भोग
बुधवार को गोवर्धन पर्व धूमधाम एवं उल्लास के साथ मनाया गया। ग्रामीण व शहरवासियों ने अपने घरों में पूरी आस्था के साथ गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन की आकृति बनाकर विधि विधान से पूजा की, जिनके घर गोधन है, वहां गोधन को स्नान कराकर उनके पैरों से गोबर कुचलाकर गोवर्धन पूजा की गई। इस दौरान घरों कुम्हड़ा (कद्दू), कोचई की सब्जी व खिचड़ी बनाई गई। इसेे मवेशियों को खिलाया गया। इसके बाद फिर सभी ने परिवार सहित खाया। वहीं चरवाहा राउत ने गोधन को सोहाई भी बांधी। बाजे-गाजे डांग डोरी के साथ राउत नृत्य करते गोवर्धन पूजा की। सभी को गोबर का टीका लगाकर गोवर्धन पूजा की बधाई दी।
इसलिए होती है गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा के बारे में मान्यता है कि देवराज इंद्र का घमंड तोडऩे के लिए श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा करने की बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने ग्रामीणों को प्रेरित किया। इंद्र को इसका पता चला तो उन्होंने पूरे गोकुल गांव को नष्ट करने व कृष्ण को अपनी शक्तियों का परिचय देने भारी बारिश करा दी। गांव में हाहाकार मच गया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठा लिया और ग्रामीणों की रक्षा की। सात दिन तक लगातार इंद्र ने अपना कहर बरपाया, लेकिन किसी भी ग्रामीण को क्षति नहीं पहुंची। तब से भगवान श्रीकृष्ण को गोवर्धन के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मंदिरों में लोग गोवर्धन भगवान की पूजा करते हैं।
आज से शुरू होगा मातर उत्सव व मड़ई मेला
बुधवार को गोवर्धन पूजा के बाद गुरुवार से मातर उत्सव व मड़ई मेला का दौर शुरू हो जाएगा। जिले के विभिन्न गांवों में गुरुवार को उत्सव मनाया जाएगा। उत्सव में डांग डोरी के साथ घर-घर पूजा करते आकर्षक रूप से सजाए कलश को सिर में धारण कर महिलाएं शोभायात्रा निकालेंगी। इस दौरान गोधन के पैरों से कद्दू कुचलाकर उनका प्रसाद बनाया जाएगा, जिसे ग्रामीणों को बांटा जाएगा। वहीं दोपहर बाद शाम को कृष्ण राधा, बलराम की नाचते गाते मटकी फड़ते शोभा यात्रा निकाली जाएगी। बाजे-गाजे के साथ युवा बुजुर्ग थिरकेंगे। इस दिन विविध सांस्कृतिक व नाचा का आयोजन किया जाएगा।
Published on:
26 Oct 2022 10:42 pm
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