
डौंडीलोहारा विकासखंड के बघमार में है कंगला मांझी की समाधि, अंग्रेजों के खिलाफ बुलंद की थी आवाज
बालोद. आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन के संरक्षण व अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद करने आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस और प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में गठित मांझी सरकार के सैनिक आज भी जिंदा हैं। नेतृत्वकर्ता कंगला मांझी (हीरा सिंह देव) के 38वें शहादत दिवस पर 5 दिसंबर को उनकी समाधि स्थल डौंडीलोहारा विकासखंड के बघमार में मांझी सरकार के सैनिक सलामी देंगे। मांझी के पुत्र केडी कांगे ने बताया कि 1914 में अंग्रेजों ने बस्तर के आदिवासियों को दबाने की कोशिश की थी। सैकड़ों हत्याएं हुर्इं। इसी दौरान जेल में मांझी की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई थी। 1920 में कोलकाता में महात्मा गांधी से मिले। मांझी को राष्ट्रीय नेताओं का सहयोग मिलना शुरू हो गया। उन्होंने सुभाषचंद्र बोस के आजाद हिंद फौज की तरह वर्दीधारी सैनिकों की फौज तैयार की।
देश भर में फैले हैं मांझी सरकार के सैनिक
वर्तमान में मांझी के वर्दीधारी सैनिक देशभर मेंं फैले हैं, जो अपनी तरह से देश की सेवा में लगे रहते हैं। वे मांझी के निधन के बाद उनके सैनिक आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैंं। अभी अखिल भारतीय माता दंतेवाड़ी समाज समिति संगठन संचालित हो रहा है। कंगला मांझी ने 1951 में लाल झंडा फहराया था। 1956 में मांझी को दुर्ग जिले के कचहरी में ध्वज फहराने का गौरव प्राप्त हुआ था।
बघमार में होती थी सैनिकों की बैठक
मांझी सैनिक मध्यप्रदेश के राजीव चक्रधारी ने जानकारी दी कि अंग्रेजों के दमन को कुचलने आदिवासी समाज के क्रांतिकारी सदस्य मांझी का जन्म बस्तर के तेलावट में हुआ था। अंग्रेजों के अन्याय के खिलाफ 1913 से वे स्वतंत्रता आंदोलन में जुड़ गए। डौंडीलोहारा विकासखंड के बघमार गांव से उन्होंने अभियान शुरू किया। बघमार को मुख्यालय बनाया। वे दो साल तक एकांतवास में रहे। उनके राष्ट्रहित आंदोलन से लोगों में एक नया जोश आया। इसके बाद से देशभर में मांझी के सैनिक तैयार होने लगे।
लोग नहीं जानते मांझी सरकार के बारे में
जिले के लोगों को अभी भी मांझी सरकार के बारे में जानकारी नहीं है। लोगों को महान क्रांतिकारी के बारे में जानकारी देने यह आयोजन जिला मुख्यालय में चार साल पहले सरदार पटेल मैदान में हुआ था। आज भी आदिवासियों को भी मांझी सरकार की त्याग, तपस्या के बारे में कोई जानकारी नहीं है। जबकि जिले में ही उनकी समाधि है।
इन राज्यों से आएंगे कंगला मांझी के सैनिक
पांच दिसंबर को मांझी सरकार कंगला मांझी की शहादत पर उनके समाधि स्थल बघमार में सैकड़ों सैनिक उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। सैनिक प्रदेश सहित महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, ओडिसा, झारखंड से पहुंच रहे हैं। रविवार को जिला मुख्यालय सहित कुसुमकसा में भी कई वर्दीधारी सैनिक दिखे।
Published on:
04 Dec 2022 11:49 pm
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