
5000 साल पुरानी विरासत देख भावुक हुए कोरियाई पर्यटक (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh News: सोशल मीडिया के माध्यम से बालोद इको टूरिज्म की टीम से संपर्क कर कोरियाई पर्यटक बालोद पहुंचे। बालोद प्रवास के दौरान पर्यटकों ने सबसे पहले सियादेवी के प्राकृतिक जंगल का भ्रमण किया। इसके बाद 5 हजार साल पुराने महापाषाण कालीन स्मारक स्थल करकाभाट को देखा और उसकी ऐतिहासिकता को गहराई से महसूस किया।
बालोद जिले में 10 किमी के दायरे में फैला करकाभाट आदिमानवों का कब्रगाह है, जहां कभी मानव जीवन पनपता था। महापाषाण काल में आदि मानवों ने पत्थरों को इस तरह सहेज कर रखा है कि वे आज भी उनकी उपस्थिति का पुख्ता सबूत देते हैं। ये विदेशी पर्यटक बालोद इको टूरिज्म एवं छत्तीसगढ़ इको टूरिज्म के प्रयास से यहां आए थे। उन्होंने सोशल मीडिया में इस स्थल के बारे में सुना व देखा था।
करकाभाट के विशाल पत्थरों की संरचना को देखकर कोरियाई पर्यटक भावुक हो गए। उन्होंने इको टूरिज्म की टीम के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 5 हजार साल पहले के पूर्वजों ने अपने दिवंगत परिजनों की कब्रों को जिस सम्मान से बनाया, वह आज भी उनकी भावनाओं को दर्शाता है। इस स्थल के शोध और संरक्षण की जरूरत है।
जिले में पर्यटन को विश्व पटल पर स्थापित करने के प्रयास साकार होते दिख रहे हैं। इको टूरिज्म के पांच वर्षों का परिणाम है कि 4 मई को कोरिया से दो विदेशी पर्यटक बालोद जिले के 5000 साल पुराने महापाषाण कालीन स्मारक स्थल करकाभाट का भ्रमण करने पहुंचे। ये पर्यटक प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों पर शोध कर रहे हैं।
कोरिया से आए पर्यटक ली संगमन ने कहा कि यह स्थल कोई आम स्थल नहीं है। किसी की मौत के बाद उसकी याद में कब्र खोदकर उसे दफन करना, फिर विशाल पत्थर खड़ा करना यह भावुक पल है। इस स्थल के बारे में लोगों को बताना चाहिए। साथ ही अपने बच्चों को भी लाना चाहिए। हर युवाओं को इस स्थल की जानकारी होनी चाहिए।
इस ऐतिहासिक स्थल की स्थिति को लेकर बालोद इको टूरिज्म ने चिंता जताई है। टीम ने प्रशासन से अपील की है कि इस 5 हजार साल पुरानी धरोहर का उचित प्रचार-प्रसार करने के साथ इसे सुरक्षित और संरक्षित रखने की आवश्यकता है। यह अमूल्य धरोहर आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रह सके। बालोद के अनुभव के बाद ये पर्यटक सिरपुर के लिए रवाना हुए, जहां से भ्रमण पूरा कर वे अपने देश लौट जाएंगे।
कार्यक्रम के संयोजक और बालोद इको टूरिज्म एवं छत्तीसगढ़ इको टूरिज्म के अध्यक्ष सूरज करियारे ने बताया कि गाइड यशकांत गढ़े और टोमेश ठाकुर ने इन कोरियाई पर्यटकों को जिले की संस्कृति और इतिहास से परिचित कराया। पर्यटकों ने यहां एक दिन बिताया और ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से जाना।
कोरियाई पर्यटकों को करकाभाट का ऐतिहासिक स्थल बेहद पसंद आया। उनका अनुभव इतना शानदार रहा कि वे भविष्य में दोबारा बालोद आने का वादा कर गए हैं। सूरज करियारे ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर प्रदान करना और जिले में स्थित सभी ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाना है।
Updated on:
07 May 2026 03:57 pm
Published on:
07 May 2026 03:56 pm
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