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अपने वेतन, पेंशन और राष्ट्रपति से मिली सम्मान राशि से बनाया गरीब बच्चों को हॉस्टल

अपने वेतन, पेंशन एवं राष्ट्रपति पुरस्कार में मिली सम्मान की राशि से गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए 50 बिस्तर अंकिचन छात्रावास बनाने वाले सेवानिवृत शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी का 93 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। निधन की खबर बालोद शहर व आसपास के क्षेत्रों में फैली तो शोक की लहर दौड़ पड़ी।

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सेवानिवृत्त शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी नहीं रहे: 1976 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार मिला

अपने वेतन, पेंशन और राष्ट्रपति से मिली सम्मान राशि से बनाया गरीब बच्चों को हॉस्टल

अपने वेतन, पेंशन एवं राष्ट्रपति पुरस्कार में मिली सम्मान की राशि से गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए 50 बिस्तर अंकिचन छात्रावास बनाने वाले सेवानिवृत शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी का 93 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। निधन की खबर बालोद शहर व आसपास के क्षेत्रों में फैली तो शोक की लहर दौड़ पड़ी।बालोद. अपने वेतन, पेंशन एवं राष्ट्रपति पुरस्कार में मिली सम्मान की राशि से गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए 50 बिस्तर अंकिचन छात्रावास बनाने वाले सेवानिवृत शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी का 93 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। निधन की खबर बालोद शहर व आसपास के क्षेत्रों में फैली तो शोक की लहर दौड़ पड़ी। उनके पार्थिव शरीर को अंमित दर्शन के लिए निवास पर रखा गया। दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार स्थानीय मुक्तिधाम में किया गया। लोगों ने इस अंतिम यात्रा में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। अमृतदास की सेवा को शायद ही कोई भूल पाएगा। नेक व बेहतर कार्य के लिए सन 1976 में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जिनको पढ़ाया वह कलेक्टर बने, कोई पुलिस अधिकारी तो कोई अन्य अधिकारी बने।

खुद गरीबी में की पढ़ाई, गरीब बच्चों के लिए बनाया हॉस्टल
सेवानिवृत्त शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी बचपन से शांत व सरल स्वभाव के थे। सामान्य परिवार से थे। पढ़ाई करने उसे कई तकलीफों का सामना करना पड़ा। उनके करीबियों के मुताबिक जब वे मिडिल स्कूल की पढ़ाई करने वाले थे तो उस समय स्कूल में प्रवेश नहीं मिला था। बाद में किसी की सहायता से उसे प्रवेश मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। लगातार पढ़ाई की। अपना पूरा जीवन पढ़ाई व सेवा में समर्पित किया।

1960 में आए थे बालोद, अंग्रेजी व हिंदी भाषा के थे शिक्षक
सेवानिवृत्त शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी बालोद में 1960 में आए थे। उसके बाद वे बालोद के शासकीय मिडिल स्कूल में अंग्रेजी व हिंदी के शिक्षक थे। उनका बचपन व पढ़ाई जिस स्थिति में गुजरी, वह चाहते थे कि कोई भी गरीब विद्यार्थी ऐसी तकलीफ न पाए।

47 साल में 5 हजार से अधिक बच्चे हॉस्टल में रहे
जब वे शिक्षक बने, तब 1971 में जरूरतमंद छात्रों को हॉस्टल में मुफ्त भोजन देना शुरू किया। इसके बाद जिला मुख्यालय के शिकारीपारा में हॉस्टल बनाने की इच्छा जाहिर की। उद्देश्य गरीब बच्चों को नि:शुल्क आश्रय देकर नि:शुल्क भोजन कराकर पढ़ाई व उनका कॅरियर बनाना था। इसके लिए उन्होंने अपने वेतन से हॉस्टल बनाया, जिसे अंकिचन छात्रावास नाम दिया गया। उन्होंने राष्ट्रपति से मिली सम्मान की राशि व बाद में सेवानिवृत्त हुए तो पेंशन की राशि को भी हॉस्टल निर्माण व कबीर मंदिर निर्माण में भी लगा दिया। 47 साल से संचालित इस 50 बिस्तर हॉस्टल में अभी तक लगभग 5 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने रहकर पढ़ाई की।

नहीं छूटा कभी डायरी का साथ
सेवानिवृत्त शिक्षक अमृत दास मानिकपुरी को हमेशा से डायरी लिखने का शौक था। वह 21 साल के थे, तब शिक्षक बने, अपनी उम्र के अंतिम पढ़ाव तक डायरी लिखना नहीं छोड़ा। उनके पास बहुत सारी डायरी है, जिसे सुरक्षित रखा है। डायरी में उनके जीवन काल के हर पल व अच्छी बातों का उल्लेख भी है।