
मुमुक्षु यशस्वी साध्वी यतना बनकर संयम के पथ पर चल पड़ी
बालोद. आचार्य भगवन 1008 रामलाल मसा से बुधवार को राजस्थान के उदयपुर में बालोद निवासी लाड़ली मुमुक्षु बहन यशस्वी सुपुत्री मांगी लाल ढेलडिय़ा ने जैन धर्म अनुसार दीक्षा ली। यशस्वी संयम पथ पर चलने साध्वी बन गई है। अब यशस्वी को साध्वी यतना श्रीजी के नाम से पहचानी जाएंगी। इस दिन एक साथ तीन लोगों ने दीक्षा ली। मुमुक्षु सिद्धि नाहर धमतरी के किशोर नाहर की बेटी है। अब उन्हें साध्वी शुद्धि श्रीजी के नाम से पहचाना जाएगा। वहीं मुमुक्षु विमला देवी भंडारी साध्वी सिद्धान्द श्रीजी बन गई। वे महाराष्ट्र की रहने वाली है। साधुमार्गी जैन संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी, स्थानीय संघ उदयपुर, धमतरी, बालोद, खैरागढ़, ब्यावर श्रीसंघ व बाहर से विभिन्न क्षेत्रों से आए संघ के विभिन्न पदाधिकारियों की उपस्थिति में दीक्षा कार्यक्रम हुआ।
आचार्य रमेश ने किया नामकरण
आचार्य रामेश ने मुमुक्षुओं का नामकरण करते हुए कहा कि मुमुक्षु यशस्वी अब नवदीक्षित साध्वी यतना जी मसा के नाम से जानी जाएंगी। केश लोचन शासन दीपिका महासती शांता कंवर के सानिध्य में हुआ।
मोह के धागे हटाए बिना अपने को सिद्ध नहीं कर सकते
आचार्य भगवन ने कहा कि मोह के धागे को हटाए बिना अपने आप को सिद्ध नहीं कर सकते। कल्याण की बात सुनना, लोग क्या कहते हैं, उसे भूलकर अपने आप में कोशिश करते रहें। मन को तोलो कि हमारा मन क्या बोल रहा। हमें समाज कल्याण, राष्ट्र के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने तपस्या पर कहा कि तपस्या में मन विचलित नहीं होना चाहिए। कई महासतियां मसा मासखमण के रथ पर आगे बढ़ रही है। महासती प्रगति श्रीजी के 29, संपन्नता के 26 व करुणा श्रीजी के 24, श्रुति श्रीजी के 24, गरिमा श्रीजी के 24 व प्रमिता श्रीजी के 24 की तपस्या चल रही है।
मैं भाग्यशाली हूं, जो गुरु की शरण में जा रही हूं
बालोद की मुमुक्षु यशस्वी ने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं, जो गुरु के शरण में जा रही हूं। मेरा परिवार भी धन्य है। किसी माता-पिता के लिए आसान नहीं होता अपने कलेजे के टुकड़े से दूर रहना। मेरे परिवार माता-पिता ने मुझे हमेशा संयम मार्ग में जाने सहयोग किया।
हमारी बेटी संयम पथ पर चल पड़ी, हमें गर्व
वीर पिता मांगी लाल ढेलडिय़ा ने कहा कि समय का पता ही नहीं चला। तीन अगस्त जल्दी आ गया। हमें गर्व है कि उनकी बेटी ने यह राह चुनी। महेश नाहटा ने बताया कि ऐसे मात- पिता निडर होते हैं, जो अपने कलेजे की कोर को जिनशासन को सौंप रहे हैं। इस दौरान पंडाल हर्ष हर्ष केसरिया केसरिया साधुमार्गी संघ केसरिया हूं, से गूंज उठा।
Published on:
03 Aug 2022 11:22 pm
बड़ी खबरें
View Allबालोद
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
