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Navratri special : इस देवी मंदिर में सीता की खोज में भाई लक्ष्मण के साथ आए थे श्रीराम

शारदीय नवरात्रि पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देश के अन्य शक्तिपीठों की तरह यहां भी पौराणिक और धार्मिक मान्यता वाले देवी मंदिर है।

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Navratri special : इस देवी मंदिर में सीता की खोज में भाई लक्ष्मण के साथ आए थे श्रीराम

Navratri special : इस देवी मंदिर में सीता की खोज में भाई लक्ष्मण के साथ आए थे श्रीराम

बालोद/गुरुर @ patrika . शारदीय नवरात्रि पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। देश के अन्य शक्तिपीठों की तरह यहां भी पौराणिक और धार्मिक मान्यता वाले देवी मंदिर है। @ patrika छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के गुरुर ब्लॉक मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर नारागांव में स्थित सिया देवी मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। मंदिर के आसपास प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है।

मंदिर का पौराणिक महत्व
प्राचीन समय से यह स्थान दंडकारण्य क्षेत्र में आता था। मान्यता है कि वनवास काल में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण देवी सीता को ढूंढते हुए आये थे। पति के प्रति निष्ठा का परीक्षण के लिए माता पार्वती ने माता सीता के रूप में भगवान राम की परीक्षा ली। लेकिन भगवान राम ने उन्हें पहचान लिया और मां के रूप में संबोधन किया। माता पार्वती को इस घटना से अपराध बोध हुआ। उन्होंने इस संबंधमें भगवान शिव को बताया और क्षमा मांगी तब शिवजी ने मां पार्वती को देवी सीता के अवतार में इसी स्थान में विराजमान होने के लिए कहा। तभी से यह स्थान देवी सीया मैया के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

माता सीता के चरण कमल के भी हैं निशान
यहां सीता माता के चरण कमल के निशान भी है। एक और मान्यता के अनुसार देवी की सवारी शेर रात में माता की रक्षा के लिए आता था। यह स्थान महर्षि वाल्मीकि के तपो भूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है। सिया देवी मंदिर में सन 1983- 84 में ज्योति कलश प्रारंभ हुआ, ज्योति प्रकाश कुंज निरंतर चलता रहा।

प्रकृति ने झरने से किया श्रृंगार
देवी मंदिर परिसर में प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों का मन मोह लेती है। सिया देवी झरना दण्डकारण्य पर्वत से प्रारंभ होकर झलमला से होते हुए वन मार्ग में दूरी तय करती है। प्राकृतिक जल प्रपात एवं गुफाओं से आच्छादित नारागांव आध्यत्मिक केंद्र और पर्यटन स्थल के लिए प्रसिद्ध है। यह पहाड़ी प्राकृतिक जल स्त्रोतों के कारण और भी मनोहारी दिखाई पड़ता है। इस पहाड़ी पर दो स्थानों से जल स्त्रोतो का उद्गम हुआ है। संगम स्थल से कलकल करती जलधारा मात्र 100 मीटर की दूरी पर एक प्राकृतिक झरने के रूप में परिवर्तित हो जाती है। इस झरने की ऊंचाई 50 फीट है। इतनी ऊंचाई से पानी का चट्टानों पर गिरकर कोहरे के रूप में दिखना प्राकृतिक सौंदर्य का बोध कराता है।

475 ज्योति कलश प्रज्ज्वलित
शारदीय नवरात्रि पर श्रद्धालुओं द्वारा 386 तेल और 89 घृत ज्योति कलश प्रज्ज्वलित की गई है। 7 अक्टूबर को शोभायात्रा निकालकर ज्योत जंवारा का विसर्जन किया जाएगा।

समिति कर रही मंदिर का संचालन
देवी की प्रसिद्धि के साथ ही साथ लोगों की आस्था और विश्वास भी दिनों-दिन बढ़ती गई। इसके बाद मंदिर समिति का गठन कर प्रांगण में अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई, जिसमें हनुमान जी, श्रीराम-सीता, लव-कुश, शंकर-पार्वती की भी प्रतिमा विराजित है। साल के दोनों चैत्र और क्वांर नवरात्रि पर मनोकामनाएं ज्योति कलश प्रज्ज्वलित की जाती है। मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से पहुंचते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है।