
साड़ी दुकानों व बाजार में खरीददारी के लिए महिलाओं की रही भीड़
बालोद. सोमवार की रात तीज आई महिलाओं ने एक-दूसरे के घर तो कई गांवों में सामूहिक रूप से करुभात खाया। मंगलवार को तीज पर्व पर पति की लंबी उम्र व कुंवारी लड़कियों ने अच्छे वर की कामना को लेकर कठिन निर्जला व्रत रखा। वहीं बहन-बेटियों के आने से मायके का आंगन गुलजार हो उठा है। महिलाओं ने हाथों में मेहंदी व सोलह श्रृंगार कर फुलेरा सजाकर भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती की विशेष आराधना कर पूजा की। व्रती महिलाओं ने मंगलवार को तीज पर्व मनाया। बुधवार की सुबह व्रत तोड़ेगी।
तीजहरिनों से बाजार हुआ गुलजार
दो साल से कोरोना संक्रमण के कारण तीज का पर्व बेरौनक था। इस साल कोरोना सामान्य है। तीजहारिन महिलाओं से बालोद शहर सहित जिले के विभिन्न शहरों का बाजार गुलजार हो गया। मंगलवार को भले महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा, लेकिन खरीदारी के लिए बाजार पहुंची। जिला मुख्यालय का सदर बाजार, बुधवारी बाजार, बस स्टैंड, जवाहर मार्केट में अच्छी भीड़ देखी गई। आने वाले दो-तीन दिन बाजार में रौनक रहेगी।
दिनभर मेले सा माहौल
बेटियों के मायके आने का सिलसिला पोला के दिन से शुुरू हो गया, लेकिन कई घरों में बहन-बेटियां व्रत के दिन भी पहुंची। इधर बस स्टैंड में तीजहारिनों की सुबह से भीड़ लगी रही। अपने बच्चों के संग वे मायके जाने घंटों बस का भी इंतजार करती नजर आईं।
फोन पर आए बुलावे पर दौड़ी चली आईं
तीजहारिन लोकेश्वरी, पदमा यादव, काजल साहू ने बताया कि तीजा में जब तक बहन-बेटी को लेने ससुराल नहीं जाते, तब तक वे मायके नहीं आती। इस रस्म के पीछे बेटी का सम्मान जुड़ा हुआ है, लेकिन अब दौड़-भाग भरी लाइफ में फोन पर ही बुलावा आता है, और उसी बुलावे पर वे मायके दौड़ी चली जाती है।
इसलिए मनाते है तीज
हरितालिका तीज सुहागिनों के लिए सबसे बड़ा व्रत है। पौराणिक कथा के अनुसार इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने किया था। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्मी माता पार्वती का विवाह उनके पिता ने भगवान विष्णु से तय किया था। इसके बाद माता पार्वती की सखियां उनका हरण कर जंगल ले गई और उन्होंने वहां बालू का शिवलिंग बनाकर निर्जला व्रत रख कठिन तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव उन्हें पति रूप में प्राप्त हुए।
Published on:
30 Aug 2022 10:20 pm
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