
भागे या गुम हुए बच्चों को ढूंढकर सौंपा
बालोद. जिले में नाबालिग बच्चों, किशोरों के गुम होने और अपहरण की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। जिले में औसतन हर महीने नाबालिग लापता हो रहे हैं। हालांकि ऑपरेशन मुस्कान के तहत पुलिस की मेहनत से इस साल 425 से ज्यादा परिवारों की खुशियां लौटी। पुलिस ने उनके गुम हुए बेटे बेटियों व अन्य लोगों को सौपकर उनके चेहरे में मुस्कान ला दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल जनवरी से नवंबर तक 425 गुम इंसानों को ढूंढ कर उनके परिवार से मिलाया है। जिसमें 4 बालक व 54 बालिकाएं भी शामिल है। जब ये गुम हुए बच्चे अपने मां बाप व परिजनों से मिले तो आंख से खुशी के आंसू छलक पड़े। बरामद किए गए गुम इंसानों में अधिकतर गुम इंसान प्रेम प्रसंग के चलते घर छोड़कर चले गए थे। वही कुछ मां-पिता की बातों से नाराज होकर। पुलिस बचे हुए 29 गुम इंसानों कि तलाश में जुट गई है।
इस साल साल 454 से ज्यादा नाबालिग व अन्य लोग हुए थे गायब
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक 2021-22 में इस साल कुल 454 लोग गुम हुए जिसमें 293 महिला, 97 पुरुष, 4 बालक और 60 बालिकाएं शामिल हैं। जिसमें से इस एक साल के अंतर्गत पुलिस ने 225 गुम इंसानों को ढूंढने में सफलता हासिल की हैं। बचे हुए गुम इंसानो की तलाश अब भी जारी है। गुमशुदगी के अधिकांश मामले में प्रेम प्रसंग के चलते परिजनों को बिना बताए घर से भाग जाने के भी मामले ज्यादा सामने आते है। अधिकांश मामले प्रेम प्रसंग का जिले के विभिन्न थानों में दर्ज नाबालिगों के गुमशुदगी की रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य शामिल हैं। अधिकांश मामले में बच्चे अपने परिजनों को बिना बताए अपने पहचान वालों के साथ ही गायब होते हैं। कई गुमशुदगी के मामले की जांच के बाद यह बात भी सामने आई कि नाबालिग लड़के लड़कियां प्रेम प्रसंग के चलते भी घर से गायब हो जाते है।
ऑपरेशन मुस्कान से मिले 60 से बालक बालिका
ऑपरेशन मुस्कान के तहत सालभर में पुलिस ने 60 बच्चों को ढूंढने में सफलता हासिल की है। जिसमें चार बच्चे है व 54 बालिकाएं शामिल हैं। पुलिस इसे बड़ी उपलब्धि मान रही और आगे भी इसी तत्परता से काम करने की बात कह रही है।
ऐसे काम कर रही है पुलिस सेल
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल में नोडल अधिकारी एएसपी हेडक्वार्टर सहित 7 अधिकारी हैं जो त्वरित कार्रवाई पर नजर रखते है। जिले में भी स्पेशल पुलिस यूनिट है। जिसके तहत महिला आरक्षक व उनकी टीम यहां बच्चों के अपराध से जुडऩे की आशंका को देखते हुए काउंसलिंग करती है। भिक्षावृत्ति करने वालों बच्चों से पूछताछ करते हैं। ऐसे बच्चों की जानकारी निकाली जाती है कि कहीं उन्हें चोरी कर तो नहीं लाया गया। सेल हमेशा चाइल्ड लाइन के संपर्क में रहती है।
इन बातों का रखें ध्यान, एएसपी हरीश राठौर की अपील
लगातार बढ़ते गुमशुदगी के मामले को लेकर एएसपी हरीश राठौर ने चिंता जाहिर की है। वहीं ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए उन्होने अपने विचार भी रखें है। उन्होंने लोगों से अपील भी कि है कि माता-पिता हमेशा बच्चों से संवाद करें। उन्हें बात-बात पर डांटे नहीं, विश्वास में लें ताकि दिल की बात साझा कर सके। छोटे बच्चों को अकेले सामान लाने के लिए नहीं भेजें क्योंकि इसका फायदा बदमाश उठा भी सकतें है। बच्चे के सामने माता-पिता अभद्र व्यवहार करें न ही मारपीट। इससे घबराकर बच्चे अक्सर घर छोड़कर चले जाते हैं। हमेशा बच्चों को सुरक्षा में लेकर ही सोना चाहिए। बच्चों के संपर्क में रहें। अन्य बच्चे क्या कर रहे है इसकी जानकारी ले और दोस्ताना व्यवहार भी करें। बच्चों को मोबाइल की ज्यादा लत है तो जानकारी भी लें कही बच्चे मोबाइल का गलत उपयोग तो नहीं कर रहे हैं। अनजान व्यक्ति के साथ बात न करें न हीं उनसे सोशल मिडिया पर दोस्ती करें। यह घातक साबित हो सकता है।
बच्चों को परिजनों को सौप दिया है
एएसपी बालोद हरीश कुमार राठौर ने बताया कि साल भर में गुमशुदगी के जितने भी मामले दर्ज हुए हैं उस पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। यही वजह है टीमवर्क से अब तक 425 से अधिक गुम नाबालिग लड़के-लड़कियों व अन्य लोगों को अन्य राज्यों व अन्य जिलों से सकुशल ढूंढ कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं बचे हुए लोगों की तलाश जारी है।
Published on:
02 Dec 2022 10:26 pm
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