
पंडाल वीरान
बालोद. जुंगेरा में पांच दिन तक चली श्री मणिलिंग शिव महापुराण कथा के समापन के बाद छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से आए शिव भक्त कथा स्थल से मिट्टी अपने साथ ले गए। समापन के बाद कथा पंडाल वीरान हो गया। जहां रात भर शिव भक्ति में भक्त लीन रहते थे। वहीं पंडाल व जगह सिर्फ यादों में रह गया। कथा स्थल को छोड़कर जाने से आंखें भी नम हो गई। लाखों शिव भक्त अपने-अपने घर रवाना हो गए।
कथा स्थल से निकलने में लगे तीन से चार घंटे
बस व रेलवे स्टेशनों में काफी भीड़ देखी गई। शिव भक्तों की ठसाठस भीड़ रही। जुंगेरा से लेकर बालोद तक लगभग 5 किमी तक भक्तों की भीड़ रही। कथा स्थल से निकलने में ही लगभग तीन से चार घंटे लग गए। रेलवे फाटक बंद होने से एक घंटे एम्बुलेंस भी फंसी रही। रेलवे फाटक बंद होने से सड़क के दोनों ओर भक्तों की भीड़ लग गई व सड़क भी जाम हो गई।
कथा स्थल पर भगवान शिव का वास, इसलिए मिट्टी ले जा रहे
बिलासपुर से आई दुर्गा साहू, राजनांदगांव की रेणुका ने बताया कि पांच दिन तक कथा चली। ऐसा कहा जाता है कि जहां शिव महापुराण कथा का आयोजन होता है, उस जगह भगवान शंकर का वास होता है। यह मिट्टी घर पर ले जाकर रखेंगे।
बालोद के इतिहास में पहली बार ऐसा आयोजन
मां शीतला सेवा समिति ने कहा कि श्री मणिलिंग शिव महापुराण कथा बालोद के इतिहास का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। अभी तक इस तरह का बड़ा आयोजन नहीं हुआ था। इस आयोजन में लगभग 8 लाख लोग शामिल हुए, जो एक रिकॉर्ड है।
जगह-जगह वितरण किया पोहा, बिस्किट, पानी, चाय
बालोद नगर सहित जिले के सेवा भावी लोगों व सामाजिक संगठनों ने बिस्किट, चाय, ठंडा पानी व पोहा का वितरण किया। यहां भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। शहर में देर रात तक प्रसाद वितरण चलता रहा।
पुलिस, कार्यकर्ता व जिला प्रशासन का भी सहयोग
इतनी बड़ी शिव महापुराण कथा के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, आयोजक समिति, कार्यकर्ता व विभिन्न सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठनों के साथ कथा में शामिल भक्तों का विशेष सहयोग रहा।
भंडारे में प्रतिदिन दो से तीन लाख भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया, प्लास्टिक का नहीं किया उपयोग
बालोद. पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा में भक्तों के लिए पांच दिन तक भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। प्रतिदिन दो से तीन लाख भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारा 24 घंटे चलता रहा। भक्तों को भोजन प्रसाद की कमी नहीं हुई। इस भोजनालय में कुल 22 मिट्टी के चूल्हा बनाए गए थे। भंडारे में भोजन बनाने वालों से लेकर, सब्जी काटने व भोजन वितरण करने वाले लगभग 500 कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था संभाली। यहां प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। स्टील की थाली में भोजन और गिलास में पानी दिया गया।
Published on:
29 Aug 2023 11:53 pm
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