
मासूमों के लिए खतरों से भरा है स्कूल का सफर, ऑटो और ई-रिक्शा वाले खचाखच भर कर पहुंचाते हैं स्कूल
Negligence बालोद शहर में स्कूल वेन व बस होते हुए भी कई पालक ऑटो एवं ई-रिक्शा लगाकर बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है। यह किसी खतरे से कम नहीं है। शिक्षा एवं परिवहन विभाग ने ऑटो एवं ई-रिक्शा में बच्चों को स्कूल नहीं भेजने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बीते दिनों में स्कूल वेन दुर्घटना की खबर आई थी। ई-रिक्शा व ऑटो से ज्यादा खतरा है। हालांकि कई परिजन स्कूल बस का किराया नहीं दे पाते हैं, इसलिए कम दाम पर ऑटो या ई-रिक्शा का उपयोग कराते हैं।
स्कूल बस का किराया नहीं दे पाते हैं कई परिजन
ऑटो एवं ई रिक्शा चालक लालच में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाते हैं। चालक की जरा सी लापरवाही से दुर्घटना हो सकती है। ऑटो व ई-रिक्शा चालकों की बैठक लेकर उसे यातायात नियमों के बारे में बताने की जरूरत है।
ई रिक्शा व ऑटो की कोई जांच तक नहीं
जिले में दोपहिया वाहनों की जांच तेजी से की जा रही है। हर रोज चालान काटा जा रहा है, लेकिन ई-रिक्शा के मामले में अफसर आंखे बंद किए हुए हैं। अधिकांश ई-रिक्शा की कमान नाबालिगों के हाथों में है। रिक्शा पलटने की कई घटनाएं भी हो चुकी हैं।
स्कूल वाहन की कुछ घटनाएं
स्कूल बस को हाइवा ने मारी टक्कर, 16 बच्चे घायल
23 मार्च 2024 को जिले के भरदा गांव में सड़क हादसा हो गया था। तेज रफ्तार हाईवा ने स्कूल बस को टक्कर मार दी थी। हादसे में एक टीचर सहित 16 बच्चे घायल हो गए थे।
चबूतरे से टकराई वेन, 10 बच्चे हुए थे घायल
11 जनवरी 2023 की शाम 5 बजे ग्राम खल्लारी के पास स्कूली बच्चों से भरी वेन बाजार चौक में चबूतरे से टकरा गई थी। घटना में 10 स्कूली बच्चे घायल हो गए थे। इसके बाद भी सबक नहीं लिया है।
स्कूल वाहन में सुरक्षा से जुड़े ये हैं नियम
बस के आगे व पीछे की तरफ स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
बस पीले रंग में रंगी होनी चाहिए।
सीटों से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
खिड़कियों पर विंडो बार (लोहे की छड़) लगी होनी चहिए।
फस्र्ट एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
बस पर स्कूल का नाम व टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए।
बस के दरवाजे पर लॉक लगा होना चाहिए।
बस चालक को भारी वाहन चलाने का पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
चालक के साथ एक सहायक होना चाहिए।
बस में कम से कम एक अध्यापक या अध्यापिका होनी चाहिए।
सेफ्टी बेल्ट और दो इमरजेंसी गेट होने चाहिए।
गति को नियंत्रित करने स्पीड अलार्म होना चाहिए।
जागरुकता अभियान चलाया जाएगा
जिला परिवहन अधिकारी प्रकाश रावटे ने कहा कि बच्चों को लाने ले जाने स्कूल बस का उपयोग किया जाना चाहिए। ऑटो व ई-रिक्शा में बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाना गलत है। जल्द जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।
फिटनेस रिपोर्ट भी मांगी जाती है
बालोद जिला शिक्षा अधिकारी पीसी मरकले ने कहा कि स्कूल बस का उपयोग बच्चों को लाने ले जाने के लिए करना है। बस भी शासन की गाइडलाइन के तहत सुविधाजनक होनी चाहिए। शिक्षा विभाग समय-समय पर स्कूल बसों की जानकारी लेता है। फिटनेस रिपोर्ट भी मांगी जाती है।
Published on:
10 Apr 2024 11:28 pm
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