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दंतैल हाथियों ने चार साल में 441 हेक्टेयर की फसल को पहुंचाया नुकसान

बालोद जिले के जंगल क्षेत्र को छोड़ अब दंतैल हाथी धमतरी लोकेशन में पहुंच गया है। चार साल में चंदा हाथियों के दल ने फसलों, मकानों को भी नुकसान पहुंचाया है।

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बालोद जिले के जंगल क्षेत्र को छोड़ अब दंतैल हाथी धमतरी लोकेशन में पहुंच गया है। चार साल में चंदा हाथियों के दल ने फसलों, मकानों को भी नुकसान पहुंचाया है।

Tusted elephant बालोद जिले के जंगल क्षेत्र को छोड़ अब दंतैल हाथी धमतरी लोकेशन में पहुंच गया है। चार साल में चंदा हाथियों के दल ने फसलों, मकानों को भी नुकसान पहुंचाया है। वन विभाग के आंकड़े देखें तो हाथियों की एंट्री जिले में 2020 में हुई थी। 2024 सितंबर तक 441 हेक्टेयर की फसलों को रौंद कर नुकसान पहुंचाया।

93.53 लाख का हुआ नुकसान

नुकसान की बात करें तो चंदा हाथियों के दल ने 93 लाख 53 हजार 880 रुपए का नुकसान किया है, जिसका भुगतान भी वन विभाग व शासन ने कर दिया है। हाथियों ने अभी तक कुल 6 लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया है। हथियों के हमले से जिन 6 लोगों की मौत हुई है, उन्हें 36 लाख का मुआवजा दिया गया है।

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अब बालोद से दूर धमतरी के जंगल में हैं हाथी

जिलेवासियों के लिए राहत की बात यह है कि पहले चंदा हाथी का दल क्षेत्र से दो साल से बाहर है। वहीं एक हाथी चंदा हाथी के दल से अलग है। वह जिले के जंगल में विचरण कर रहा था। दूसरी ओर ये दंतैल हाथी जिले के वन परिक्षेत्र को छोड़ धमतरी वन परिक्षेत्र में विचरण कर रहा है।

5 साल में 121 मकान तोड़े, 5 पशुओं को मारा

वन विभाग से मिले आंकड़े देखें तो हाथियों की जब से एंट्री हुई है, तब से इन 5 साल में हाथियों के दल ने कुल 121 मकान तोड़े हैं और 5 मवेशी मारे गए हैं। अन्य सम्पत्ति हानि के 177 प्रकरण दर्ज हैं।

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कुल 1 करोड़ 70 लाख रुपए का पहुंचाया नुकसान

कोरोना काल के समय ही चंदा हथियों के दल ने पहली बार बालोद जिले के जंगल में दस्तक दी। उस समय हाथियों की संख्या लगभग 30 से अधिक थी। हाथियों की सबसे ज्यादा दहशत लोगों में कोरोना काल के समय रही।

किस साल हाथियों ने कितना नुकसान किया

साल - प्रकरण - मुआवजा राशि
2020 - 396 - 37 लाख 20 हजार 831
2021 - 739 - 85 लाख 45 हजार 725
2022 - 241 - 36 लाख 13 हजार 276
2023 - 71 - 11 लाख 17 हजार 711
2024 -6 - 34 हजार 600 रुपए
कुल - 1453 - 1 करोड़ 70 लाख 32 हजार 143 रुपए
नोट - आंकड़े वन विभाग के अनुसार सितंबर की स्थिति में।