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पंचायत में गबन मामले में बालोद एसडीएम और जनपद सीईओ में वाट्सएप पर चले शब्दबाण

जनपद बालोद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेन्द्र पड़ौती के खिलाफ एसडीएम द्वारा जमानती वारंट जारी किए जाने के मामले ने तुल पकडऩे लगा है।

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बालोद. जनपद बालोद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेन्द्र पड़ौती के खिलाफ एसडीएम द्वारा जमानती वारंट जारी किए जाने के मामले ने तुल पकडऩे लगा है। मामले में सीईओ और एसडीएम के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। वहीं जिले के सभी जनपद सीईओ एकराय से बालोद सीईओ के खिलाफ जारी गिरफ्तारी आदेश का विरोध करने लगे हैं। वे एसडीएम के इस आदेश को गलत करार दे रहे हैं। जिले के जनपदों के सीईओ अब इस मामले पर जल्द ही बैठक लेकर आगे की रणनीति बनाने की सोच रहे हंै। हो सके तो मंगलवार को कलक्टर को भी इस मामले पर चर्चा कर पत्र सौंप सकते हंै।

सीईओ को बयान के लिए बुलवाए थे
ज्ञात हो कि एसडीएम हरेश मंडावी ने बालोद जनपद सीईओ राजेन्द्र पड़ौती को ग्राम पंचायत के एक गबन के मामले पर बयान के लिए बुलवाए थे, पर बयान के लिए समय नहीं देने व कई बार सूचित करने के बाद भी एसडीएम ने जमानती वारंट जारी कर दिया था। जब इस बात की जानकारी हुई तो सारा
काम छोड़कर जनपद सीईओ पड़ौती तत्काल एसडीएम न्यायालय पहुंचे।

एसडीएम व सीईओ के बीच जुबानी जंग
मामले पर अब तो एसडीएम और जनपद सीईओ के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। मामले में खबर प्रकाशन के बाद जनपद सीईओ राजेंद्र पड़ौती ने पत्रिका संवाददाता से बात की और कहा मुझे एसडीएम से ऐसा कुछ आदेश नहीं मिला है। मामले में एसडीएम से बात की गई, तो उन्होंने कहा न ही उसने कोई पत्र जारी किया है और न ही अखबार में छपाने किसी से कहा है।

गिरफ्तारी वारंट भी जारी करते
जब पत्रिका ने एसडीएम हरेश मंडावी से बात की तो उन्होंने कहा कि बालोद जनपद सीईओ ने खुद ग्राम पंचायत का केस लगाया है। केस लगाने के बाद उन्हें तीन-चार बार बयान के लिए बुलाया गया। फोन से सूचना भी दी गई, तो पर भी सीईओ पड़ौती नहीं आए, इस कारण बालोद जनपद सीईओ के खिलाफ समन आदेश जारी किया गया। अगर वह एसडीएम न्यायालय नहीं आते तो उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी करते।

ये है पूरा मामला

ग्राम पंचायत करहीभदर के सरपंच ओंकार साहू पर 8 लाख 40 हजार का गबन का मामला ढाई साल से चल रहा है। मामले में सरपंच ओंकार साहू को धारा 39 के तहत निलंबित भी किया गया था। पर धारा 40 बर्खास्तगी की कार्रवाई के लिए एसडीएम हरेश मंडावी के समक्ष पेशी अभी भी चल रही है। इतना ही नहीं 8 लाख 40 हजार के गबन के अलावा और भी अन्य 2 मामले में केस सरपंच के खिलाफ एसडीएम के पास चल रहे हैं।

उच्च न्यायालय से इस मामले पर स्थगन आदेश

इसमें 15 लाख 40 हजार शौचालय की राशि हितग्राहियों को नहीं दी जाने की शिकायत एवं 1 लाख 82 हजार की राशि मवेशी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बिना उच्च अधिकारी से पूछे पंचायत को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई का मामला है। तीनों मामलों की शिकायत पर एसडीएम कार्यालय में इसकी जांच चल रही है। गबन मामले में सरपंच ओंकार साहू दोषी पाए गए हैं। सरपंच ने उच्च न्यायालय से इस मामले पर स्थगन आदेश ले लिया था जिसके कारण वे अपने पद पर बने हुए हैं।

सीईओ ने पत्रिका को पोस्ट की जनपद के जाबांज में जवाब
इधर पत्रिका में खबर प्रकाशन के बाद जनपद सीईओ राजेन्द्र पड़ौती ने जिले के जनपद सीईओ के एक वाट्सएप ग्रुप जनपद के जाबांज की स्क्रीन शॉट पत्रिका को पोस्ट की, जिसमें उन पर एसडीएम द्वारा जमानती वारंट की कार्रवाई को लेकर सभी जनपद सीईओ ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने इस कार्रवाई को गलत बताया है। मामले पर सभी जनपद सीईओ ने अपने वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सभी को एकजुट होकर मंगलवार को कलक्टर से मिलने की योजना बनाई है।


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