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पहाड़ से मुंह के बल गिरा हाथी, डॉक्टर बोले- लीवर व लंग्स में कंजक्शन से हुई मौत

Elephant death: रामानुजगंज से 1 किमी दूर वन वाटिका विश्रामगृह के समीप सुबह मिला हाथी का शव (Elephant dead body), 3 पशु चिकित्सकों की टीम ने हाथी के शव का किया पीएम, मौत का वास्तविक कारण जानने लैब भेजे जा रहे शरीर के विभिन्न अंग

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Elephant death

Elephant dead body

रामानुजगंज. Elephant death) नगर से करीब 1 किमी दूर वन वाटिका विश्रामगृह के नजदीक शुक्रवार की सुबह 10 बजे एक नर हाथी का शव मिला। सूचना मिलते ही डीएफओ विवेकानंद झा के नेतृत्व में वन अमला मौके पर पहुंचा। वहीं वाइल्ड एनिमल के अधिकारी भी पहुंचे। घटनास्थल पर ही 3 पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा पोस्टमार्टम कराकर शव को दफन कर दिया गया। हाथी पहाड़ से मुंह के बल गिरा (Elephant fell from mountain) था। डॉक्टरों के प्रारंभिक जांच में लीवर एवं लंग्स में कंजक्शन के कारण मौत होना बताया जा रहा है। वहीं मौत के वास्तविक कारण जानने शरीर के विभिन्न अंगों को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है।


शुक्रवार की रात रामानुजगंज से लगे देवीगंज के जंगल में एक नर हाथी देखा गया था। वह पुरुषोत्तमपुर होते वन वाटिका नर्सरी के पश्चिम से होकर वन वाटिका विश्रामगृह के नजदीक पहाड़ पर चढ़ा था। इसी बीच वह पड़ा से अचानक नीचे गिर गया। सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर वन अमले ने हाथी को गिरा हुआ देखा।

नजदीक जाने पर हाथी के मृत होने की पुष्टि हुई। इसकी सूचना तत्काल वन विभाग के उच्च अधिकारियों को दी गई। सूचना मिलते ही डीएफओ विवेकानंद झा व वाइल्ड एनिमल के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर ही हाथी के शव का पोस्टमार्टम करा कर दफन कर दिया गया।

नर हाथी की उम्र 30 से 35 वर्ष के बीच बताई जा रही है। शव का पोस्टमार्टम डॉ. विकास जायसवाल, डॉ. विजय बहादुर सिंह व डॉक्टर डीएन सिंह के द्वारा की गई।


डीएफओ का ये है कहना
वनमंडलाधिकारी विवेकानंद झा ने बताया कि लीवर एवं लंग्स में कंजक्शन के कारण प्रारंभिक तौर पर मौत होने की बात सामने आ रही है। पहाड़ में ढलान होने की वजह से मुंह के बल हाथी गिरा है, जिसकी उम्र 30 से 35 साल के बीच है। वहीं मौत के वास्तविक कारण जानने के लिए शरीर के विभिन्न अंगों के जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है।

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नगर सीमा से 1 किमी दूर मिला मृत
नगर सीमा से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर वन वाटिका विश्रामगृह के नजदीक पहाड़ से उतरने के दौरान हाथी की मौत होना बताया जा रहा है। मुंह के बल हाथी के गिरने के कारण उसका सूंड मिट्टी में दब गया था। गौरतलब है कि रामानुजगंज में करीब 25 हजार की आबादी है।

रामानुजगंज चारों तरफ से जंगलों और पहाडिय़ों से घिरा हुआ है, हालांकि शहर के इतने नजदीक हाथी कैसे पहुंचा, यह अब तक पता नहीं चल सका है। इस वर्ष फरवरी महीने में भी हाथियों का दल (Elephants team) रामानुजगंज वन वाटिका में पहुंच गया था।


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