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लौंग के ये चमत्कारी गुण जानकर आप रह जाएंगे हैरान, ऐसा करने पर मिलेगा नया जीवनदान

अगर आप किसी विशेष कार्य से बाहर जाना चाहते हैं तो सबसे पहले चार लौंग जलाकर उसकी भस्म का तिलक लगाएं।

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बलरामपुर. लौंग के बारे में तो हम सभी जानते हैं। इसका प्रयोग खानपान में, पूजा की सामग्री में, खुशबु के लिए, माउथ फ्रेशनर के रूप में, दातों के दर्द के निवारण के लिए आदि में प्रयोग की जाती है। इसका प्रयोग तांत्रिक प्रयोगों के लिए भी होता हैं। प्रत्येक कर्म सम्मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, मारण, विद्वेषण, मोहन, सुरक्षा व अन्य सिद्धि लौंग के बिना अधूरी हैं। यह सर्वार्थसिद्धि के काम में आती है। इसके बारें में बलरामपुर के पंडित दीनानाथ त्रिपाठी के बताया कि शत्रुओं को पररास्त करने के लिए-प्रातःकाल सात बार हनुमान जी को लडडू का भोग लगायें और पांच लौंग पूजा स्थान में देशी कपूर के साथ जलायें, फिर भस्म से तिलक करके घर से बाहर जायें। ऐसा करने पर आप शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम होंगे।

भस्म के तिलक का प्रयोग

अगर आप किसी विशेष कार्य से बाहर जाना चाहते हैं तो सबसे पहले चार लौंग जलाकर उसकी भस्म का तिलक लगाएं। ऐसा करके जाने से कार्य में सिद्धि मिलती है। इसके अलावा किसी को अपने प्रभाव में लाने हेतु-बुधवार को पेड़ के नीचे एक लौंग दबायें। ऐसा 7 दिन तक नियमित 24 घण्टें में एक बार उस पर पेशाब करें और फिर आठवें दिन लौंग को निकालकर चूर्ण बनाकर इच्छित व्यक्ति को खिलाने से जातक आपके प्रभाव में आ जाता है।


धन लाभ के लिए

धन लाभ के लिए रोज सुबह दीपक जलाकर उसमें दौ लौंग डाल दें। इसके बाद घर से निकले। भगवान गणपति को दूर्वा एवं लडडू का भोग लगायें व भगवति लक्ष्मी के चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर सरसों का तेल तथा काली उड़द का दान करें। नित्य प्रातः तुलसी के पौधों में जल अर्पित करें। ये उपाय कम से कम 1 वर्ष तक करने से आर्थिक समृद्धि आती है। नकसीर बंद-लौंग जलाकर पानी में डालकर नाक में डालने से नकसीर बन्द हो जाती है।

कमजोरी दूर करने के लिए

कमजोरी दूर करने के लिए एक तोला लौंग, तीन माशा चमेली के तेल को जलाकर कपड़े में छानकर रात को मालिश करें व साथ में पान का पत्ता बाॅधने से लाभ मिलता है। प्रेतबाधा निवारण-रविवार या मंगलवार को धूपबत्ती जलाकर कटोरी में 11 लौंग रखकर धूपबत्ती पर लोबान डालकर शुद्ध करें व हनुमान या चामुण्डा अथवा गायत्री मन्त्र के साथ 11 माला जपकर माला लौंग से स्पर्श कराकर रोगी की भुजा पर बांधें।

दरिद्रता दूर करने के लिए

दीपावली, अमावस्या की रात्रि या ग्रहण काल में एक लौंग, एक इलायची जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को देवी-देवताओं चित्रों या यन्त्रों में लगाने से घर की दरिद्रता दूर होने लगती है। व्यवसाय में लाभ के लिए-शनिवार के दिन सिन्दूर, चाॅदी का वर्क, पाॅच मोतीचूर के लडडू, चमेली का तेल व एक पान का बीड़ा व नियमित रूप से शनिवार के दिन हनुमान जी को अर्पण करें तथा वर्ष में दो बार नवरात्र या मंगलवार के दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने से व्यवसाय में लाभ होता है।