
बलरामपुर. मंजिल उनको मिलती है जिनके सपने मे जान होती है, पंखो से कुछ नही होता हौसलो में उड़ान होती है या यू कहें कि कहते है कि जिसमें हौसला होता है वो आसमान में भी छेद करने की ताकत रखता है। बलरामपुर में पेशे से मजदूर एक ऐसा शख्स है जिसकी दिव्यांगता भी उसके हौसलो के आगे बहुत बौनी नजर आती है। उसका हौसला हमारे समाज के लिये एक प्रेरणादायक नजीर पेश करता है। बलरामपुर से एक खास रिपोर्ट—
ऊँची इमारत की गहरी नींव खोदने के लिये फावडा चला रहा यह मजदूर सामान्य मजदूरो से अलग है तभी तो कैमरे की नजर इस मजदूर पर पडी। जी हाँ आप भी जरा ध्यान से देखिये यह मजदूर जो फावडा चलाने में पूरी तरह तल्लीन है उसके तो एक हाथ ही नही है। अन्य मजदूरो की तरह वह दोनो हाथो से खुदाई नही कर रहा है बल्कि अपने एक हाथ से ही वह उन्ही मजदूरो की तरह कार्य कर रहा है जैसे दोनो हाथो से मजदूर करते है। जी हाँ यह मजदूर राजाराम वर्मा है जिसके पास दाहिना हाथ ही नही है लेकिन वह किसी अन्य मजदूर से कम नही। वह उतना ही काम एक हाथ से करता है जितना काम अन्य मजदूर अपने दोनो हाथो से करते है। अपनी मेहनत से रोजी-रोटी कमाने वाला यह इन्सान अपनी बीबी और चार बच्चो का पेट पालता है।
राजाराम वर्मा जब दस साल का था तभी उसका दाहिना हाथ करेन्ट की चपेट में आ गया था और उसे काटना पडा था। कुछ दिन तो निराशा के गर्त में गुजरे लेकिन जीवन के संघर्षो में राजाराम ने हार नही मानी और वह मजदूरी करने निकल पडा। रंजीतपुर गाँव के रहने वाले 40 वर्षीय राजाराम ने अपने स्वाभिमान को जगाये रखा। उसने किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपनी भुजा पर ही भरोसा करने का फैसला किया। पिछले 25 वर्षो से राजाराम लगातार मेहनकश मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का पेट पालता है। राजाराम को कभी किसी से शिकायत नही रही । नही उस ईश्वर से जिसने उसका एक हाथ छीन लिया और न ही उस सिस्टम से जो उसे एक पक्का मकान भी बनवा के न दे सका। अपने कामं के ही धुन में मस्त राजाराम अपने बच्चो को पढा-लिखाकर किसी काबिल बनाना चाहता है इसलिये वह दिनरात-मेहनत-मजदूरी करता है। उसकी इस मेहनत से उसके साथी मजदूर और ठेकेदार भी उसकी प्रशंशा करते नही थकते।
जीवन के संघर्षो में आदमी जब हताश और निराश हो जाता है तो राजाराम जैसे लोग एक प्रेरणा देते है। संघर्षो के बीच जिजीविषा की यह तस्वीर उन लोगो को भी प्रेरणा देती है जो अपनी दुर्बलताओ का श्रेय सिस्टम पर मढ देते है। लेकिन इन्ही सिस्टम में रहते हुये राजाराम को सिस्टम से कोई शिकवा-शिकायत नही है उसे भरोसा है तो सिर्फ अपनी एकमात्र भुजा पर।
Published on:
01 May 2018 02:00 pm
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