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Polio Awareness Week: पोलियो है खतरनाक बीमारी, ऐसे करें बचाव

6 अगस्त से 12 अगस्त तक पोलियो अवेयरनेस वीक मनाया जा रहा है।

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BALRAMPUR

UP health department given infected polio drops to one crore children

बलरामपुर. वैसे तो हमारा देश पोलियो मुक्त हो चुका है लेकिन अगर हमने जरा सी भी लापरवाही हुई तो फिर से पोलियो का वायरस देश में मिल सकता है। पोलियो पिलाने को लेकर बच्चों के माता पिता में कई तरह की भ्रातियां रहती हैं जिसे खत्म करने के लिए पोलियो अवेयरनेस वीक मनाया जा रहा है। 6 अगस्त से 12 अगस्त तक पोलियो अवेयरनेस वीक मनाया जा रहा है। पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए 1995 में पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत नवजात से लेकर 5 साल के बच्चों को पल्स पोलियो की वैक्सीन (टीकाकरण) की दवा पिलाकर पोलियो के वायरस से बचाया जाता है।

पोलियो से होने वाले नुकसान
पोलियो वायरल इंफेक्शन से होने वाली एक ऐसी बीमारी है जो कभी ठीक नहीं हो सकती। इसकी चपेट में हमेशा कम उम्र के बच्चे आते हैं। बच्चों के शरीर का कोई खास तौर पर पैर पाइरालाइज्ड हो जाता है इसके चलते बच्चे पैर से विकलांग हो जाते हैं। इसलिए उन्हें जितनी जल्दी हो सके इससे बचने का प्रयास करना है। नवजात बच्चे से लेकर 5 साल तक के बच्चों को पोलियो की खुराक जरुर पिलानी चाहिए। नवजात से लेकर 5 साल तक के बच्चों पोलियो ड्रॉप पिलाकर पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है। पोलियो की खुराक पिलाने से पोलियो होने की संभावना कम हो जाती है। पोलियो की दवा पिलाने से बच्चों में इंफेक्शन होने के खतरा नहीं रहता। पोलियो का वायरस बच्चों की मांसपेशियों को कमजोर कर देता है। पोलियो के ज्यादातर मामलों में बच्चों के पैर पर पोलियो अटैक करता है। कुछ मामलों में पोलियो का वायरस बच्चों के सिर की मांसपेशियों पर भी असर करता है। जब ये वायरस बच्चों पर अटैक करता है तो कुछ बच्चों को इसमें बुखार आता है, सिर में दर्द होता है, गर्दन में अकड़न होती है, बांह या पैरों में दर्द होता है। लेकिन पोलियो वायरस अटैक करने के 70 प्रतिशत मामले एेसे होते हैं जिनमें बच्चों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते। पोलियो का कई स्थाई इलाज नहीं है। पोलियो टीका ही इसका एक मात्र बचाव है। बच्चों को पोलियो ड्रॉप हर बार पिलाने जरुर है।

क्या है पोलियो
पोलियो माइलाइटिस (पोलियो) अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग है, जो कि मुख्यत: छोटे बच्चों जिनकी आयु पांच वर्ष से कम होती है, को प्रभावित करता है। विषाणु मुख्यत: मल-मौखिक मार्ग के माध्यम या किसी सामान्य वाहन (उदाहरण के लिए दूषित पानी या भोजन) द्वारा व्यक्ति-से-व्यक्ति में फैलता है, और आंत में दोगुना हो जाता है, वहां से यह तंत्रिका तंत्र में पहुँच जाता है तथा पक्षाघात पैदा करता है।

पोलियो के लक्षण

बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, गर्दन की अकडऩ और अंगों में दर्द है। दो सौ में से एक संक्रमण अपरिवर्तनीय पक्षाघात (आमतौर पर पैरों में) उत्पन्न करता है।