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Banda News:दहेज हत्या में पति को 7 साल की सजा, सास बरी; अदालत का 58 पन्नों में आया फैसला

Dowry Death Banda Case:बांदा में दहेज हत्या के मामले में अदालत ने पति को सात साल की सजा सुनाई। सास को साक्ष्य के अभाव में बरी किया गया, जबकि ससुर की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है।
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बांदा

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Avanish Kumar

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Updated: 28 Mar 2026, 8:57 PM IST

दहेज हत्या मामले में अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद न्यायालय परिसर की प्रतीकात्मक तस्वीर।

बांदा। दहेज हत्या के एक चर्चित मामले में शनिवार को अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए दोषी पति को कठोर सजा दी। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश डकैती छोटेलाल यादव की अदालत ने आरोपी पति जमील खां को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अन्य धाराओं में सजा के साथ करीब साढ़े चार हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड न चुकाने की स्थिति में दोषी को दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

अदालत के अनुसार, आरोपी घटना के समय से ही जेल में निरुद्ध है। इस मामले में सह-आरोपी ससुर सहादत खां की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी है, जबकि सास जोहरा खातून को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ना का आरोप

मामला बदौसा थाना क्षेत्र के बगीचापुरवा गांव का है। यहां निवासी शरीफ खां ने 18 सितंबर 2020 को नरैनी थाने में तहरीर देकर बहन की हत्या का आरोप लगाया था। तहरीर में बताया गया कि उसकी बहन सहरोजा की शादी वर्ष 2018 में कल्हरा गांव निवासी जमील खां के साथ हुई थी।शादी के बाद से ही पति, सास और ससुर द्वारा एक बाइक और एक लाख रुपये की अतिरिक्त दहेज की मांग की जा रही थी।

आरोप था कि मांग पूरी न होने पर सहरोजा को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। उसे मारपीट कर कमरे में बंद कर दिया जाता था और कई बार खाना तक नहीं दिया जाता था।पीड़िता ने अपने भाई को पहले ही आशंका जताई थी कि यदि जल्द मदद नहीं मिली तो उसकी हत्या कर दी जाएगी।

इस दौरान 17 सितंबर 2020 को ससुराल पक्ष की ओर से फोन कर सहरोजा की मौत की सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे भाई ने हत्या की आशंका जताते हुए ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

जांच और सुनवाई के बाद आया फैसला

विवेचना के दौरान पुलिस ने कुछ आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में अलग कर दिया और पति, सास व ससुर के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश किए गए। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर 58 पृष्ठीय निर्णय में पति जमील खां को दोषी ठहराया। वहीं सास को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। इस फैसले के साथ लंबे समय से लंबित इस मामले का निस्तारण हो गया।