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हृदय दान से बची 13 साल के बच्चे की जिंदगी

ब्रेन डैथ के बाद रवि के परिजनों ने उसका हृदय दान कर दिया

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हृदय दान से बची 13 साल के बच्चे की जिंदगी

बेंगलूरु. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टणम में सड़क हादसे में बुरी तरह घायल और उपचार के दौरान ब्रेन डेड घोषित 20 वर्षीय रवि (परिवर्तित नाम) ने बेंगलूरु के 13 साल के विक्रम (परिवर्तित नाम) को नई जिंदगी दी। ब्रेन डैथ के बाद रवि के परिजनों ने उसका हृदय दान कर दिया। सोमवार रात धड़कता हृदय हवाई जहाज से बेंगलूरु लाया गया। यातायात पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एम्बुलेंस को रास्ता दिया। एंबुलेंस ने हवाई अड्डे से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित फोर्टिस अस्पताल तक की दूरी करीब 45 मिनट में तय की। हृदय वहां पहुंचते ही पहले से पूरी तरह तैयार चिकित्सकों की टीम ने हृदय को विक्रम के शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया।


सभी तालुकों में होगा रंगमंदिर का निर्माण
इलकल. कर्नाटक नाटक अकादमी की ओर से सरकार का सहयोग लेकर राज्य के सभी तालुक केन्द्रों में रंगमंदिरों का निर्माण किया जाएगा। यह बात नाटक अकादमी के सदस्य शशिकांत यडहल्ली ने कही। वे श्री विजय महंतेश मठ में अकादमी एवं नाट्यरानी कला संघ की ओर से आयोजित प्रशिक्षणार्थियों के शिविर के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि इस बार अकादमी की ओर से राज्य के अनेक जिलों में रंग प्रशिक्षण एवं रंगमंच को विशेष महत्व दिया गया है। जितना ज्यादा संभव बन सकेगा उतने ज्यादा कार्यक्रम बागलकोट जिले में किए जाएंगे।

मुख्य अतिथि रंगमंच की ख्यात कलाकार नागरत्नम्मा मरियम्मनहल्ली, अकादमी सदस्य विजय कुमारी, अकादमी प्रशस्ति पुरस्कृत कलाकार माता मन्जम्मा जोगती, स्नेहरंग संस्था अध्यक्ष के.ए. बन्नट्टी, सचिव सेवानिवृत्त शिक्षक महादेव कम्बागी, बल्लारी के रंगकर्मी पुरुषोत्तम हन्दयाल, नाट्यरानी कला संघ की अध्यक्ष उमाराणी बारीगीडद उपस्थित थे। कार्यक्रम के अध्यक्ष जानपद विद्वान डॉ. शंभू बलीगार ने कहा कि एक महीने में 50 लड़कियों को शिविर में प्रशिक्षण देकर उत्तम कलाकार बनाया गया है।

बच्चों ने उत्तम अभिनय का प्रदर्शन कर के सभी को मंत्रमुग्ध किया है। उनकी मेहनत सफल हुई है। मठाधीश गुरूमहांतस्वामी ने आशीर्वचन दिया।
प्रशिक्षित कलाकारों ने मैसूर शिवानन्द का रचित एवं नरसिंहय्या का निर्देशित नाटक मडीवाल माचीदेव का सफलतापूर्वक मंचन करके दर्शकों की वाहवाही लूटी। श्रीनिवास चैतन्य ने प्रार्थना गीत प्रस्तुत किया। उमारानी बारीगीडद ने स्वागत किया। संचालन ढगलचन्द पवार ने किया। बसवराज कौटी ने आभार जताया।