
प्रदर्शन
कर्मचारी नेताओं ने सरकार के इस कदम की भत्र्सना करतें हुए कहा कि 15 हजार परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है
बेंगलूरु. समाज कल्याण विभाग व राजकीय विद्यालयों के विभिन्न छात्रावासों में ठेके पर कार्य कर रहे करीब 15 हजार से अधिक बावर्चियों और सहायकों को एक सप्ताह पूर्व बिना किसी सूचना के हटा दिया गया। कर्मचारियों ने इसके विरोध में गुरुवार को फ्रीडम पार्क में धरना दिया और सभा का आयोजन किया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार के इस कदम की भत्र्सना करतें हुए कहा कि 15 हजार परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद स्वामी की अध्यक्षता में आयोजित सभा को अनेक कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया। उनका कहना था कि वे 10 से 12 वर्ष से काम कर रहे हैं। पिछली सरकार ने भी उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन विरोध के बाद सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े। नई गठबंधन सरकार ने 20 जून को सभी कर्मचारियों को हटा दिया है। इससे उनके परिवारों के भरण पोषण का संकट हो गया है। सरकार अब नए ठेकेदार नियुक्त करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि वे तहसील व जिला मुख्यालयों पर धरना व प्रदर्शन कर उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भी दे चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इस पर राज्य के तीसों जिलों के कर्मचारियों को बेंगलूरु कूच करना पड़ा। को ऑपरेटिव सचिव हनुमय गौड़ा ने भी सभा को सम्बोधित किया।
कर्मचारियों का कहना है
चामराज नगर के विश्वनाथ, विष्णुवर्धन और मल्लिकार्जुन ने बताया कि नई सरकार गठन के एक पखवाड़े बाद ही कुक एवं सहायकों पर गाज गिरी है। इससे सरकार की मंशा का पता चलता है कि वह कितनी कर्मचारी विरोधी है। सरकार के इस निर्णय से 15 हजार परिवारों के घर चूल्हा जलने का भी संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपने निर्णय पर पुर्न विचार कर हटाए गए कर्मचारियों की सेवाएं पुन: बहाल करनी चाहिए।
Published on:
28 Jun 2018 09:32 pm
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